बरेली। फायरिंग कांड के बाद राना मोबाइल फोन बंद करके कई जगह छुपता रहा। फिलहाल, वह मथुरा में शरण लेने की तैयारी में था। होटल और घर टूटने का पता लगा तो सीधे बरेली चला आया। उसने पुलिस को कागजात देकर बताया कि इस प्लॉट का वह वैध मालिक है।
राना को लेकर बिथरी पुलिस की गाड़ी सीधे बारादरी थाने पहुंची। वहां उससे पूछताछ की। फिर क्राइम ब्रांच के दफ्तर झुमका चौराहे पर ले जाकर एसओजी व पुलिस ने उससे संयुक्त पूछताछ की। शाम के वक्त राना को पुलिस इज्जतनगर थाने ले आई। वहां सीओ तृतीय व इज्जतनगर इंस्पेक्टर ने उससे पूछताछ की। राना ने बताया कि डॉ. भारती गुप्ता को जब आदित्य ने जमीन पर कब्जा नहीं दिया तो उन्होंने जमीन उसे बेच दी। तीन महीने पहले जमीन खरीदने के बाद उसने कोर्ट की शरण ली। वहां से उसके हक में कब्जा हटाने का आदेश पारित हो गया। पुलिस वैध तरीके से कब्जा नहीं हटवा रही थी तो उसने तत्कालीन इंस्पेक्टर से बात कर ली। उन्होंने कह दिया कि कब्जा ले लो, हम देख लेंगे। कुछ पुलिस भी साथ आई पर आदित्य के आकर फायरिंग करने से बवाल हो गया।
पहली बार अपराधी की तरह भागा
राना ने बताया कि उसने कोई अपराध नहीं किया है। पहली बार इस घटना के बाद वह अपराधी की तरह भागा। वह पहले लखनऊ गया था। वहां से हरिद्वार गया था। अब उसने कुछ दिन मथुरा में रहने का जुगाड़ कर लिया था। वह वहां जा ही रहा था कि घर और होटल तोड़ने की खबर मिली। तब उसने आत्मसमर्पण कर दिया।
केपी और संजय के वारंट जारी कराएगी पुलिस
पुलिस अब राजीव के भाई संजय राना और भाड़े पर बदमाश जुटाने वाले केपी यादव की तलाश में है। हिस्ट्रीशीटर केपी यादव भी आत्मसमर्पण करने की जुगाड़ में है। उसे एनकाउंटर का खतरा सता रहा है। केपी यादव ने जिले में ही कहीं शरण ले रखी है। बताया जा रहा है केपी अपने करीबी दो पुलिसकर्मियों के संपर्क में है। उसके गुर्गे शहर छोड़कर भाग गए हैं। जिन गुर्गों के नाम सामने आए हैं, वह भी सरेंडर करने के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं। ब्यूरो