बड़े लोगों ने रामगंगा के किनारे-किनारे 40 किलोमीटर तक जमीनें कौड़ियो में खरीदने के साथ सैकड़ों बीघा सरकारी जमीन पर भी कब्जा कर रखा है। हालांकि किसी अधिकारी को इसकी परवाह नहीं है। ग्राम गुरऊ खजुआई के डेयरी मालिक ने झंडू नाम के किसान की जमीन कौड़ियों में लिखा ली। झंडू के बेटों को भी विश्वास में नहीं लिया। बड़े बेटे भारत ने विरोध करते हुए इंसाफ की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने उसकी फरियाद नहीं सुनी। आखिर परेशान होकर भारत ने गेरु आ वस्त्र पहन लिए। झंडू का बेटा दर-दर भटक रहा है। पूरा परिवार परेशान है। जमीन का बैनामा होने के बाद झंडू बिहार स्थित अपनी ससुराल चला गए थे। इन दिनों बदायूं के दातागंज इलाके में अपने रिश्तेदार के पास रहते हैं।
रामगंगा नदी के किनारे बरेली शहर की तरफ अंगूरी, फरीदापुर, टोहनी, बिरिया, ऊंचा गांव, सराय, धुरा राघवपुर, दौली रघुवर दयाल आदि गांव हैं। इसके पार अखा, ढका, गुरऊ खजुआई, गंगापुर, जितौैर, गोकिलपुर, सामपुर, डाह, ऐंठपुर, सुजलपुर आदि गांव हैं। इन गांव की सैकड़ों बीघा जमीन ग्राम समाज की है। नदी किनारे की जमीन सिंचाई विभाग की है। रामगंगा के दोनों किनारों पर कुछ बडे़ लोगोेें ने किसानों से कौड़ियो में जमीन खरीदकर आसपास की सरकारी जमीन पर भी कब्जा कर लिया है। जिला मुख्यालय से क रीब 15 किलोमीटर दूर गैनी रोड पर अखा और ढका गांव से आगे गुरऊ खजुआई गांव है। इस गांव से आधा किलोमीटर पहले रूप किशोर गोला की कामधेनु डेयरी है। डेयरी पर मुख्य रूप से उनके छोटे भाई अवधेश गोला उर्फ बंटी रहते हैं। उन्होंने यहीं पर कभी करीब 50 एकड़ जमीन का फार्म हाउस बना लिया है लेकिन कई किसान उनसे दुखी हैं। किसानों की मांग है कि उनकी जमीन को डेयरी मालिक के कब्जे से मुक्त कराया जाए। इसके अलावा जिला प्रशासन को चाहिए कि रामगंगा किनारे की जमीन की नापजोख कराकर सरकारी जमीन से कब्जे हटवाए।