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जीबीपंत और राममूर्ति की बरेली में सूख गई कांग्रेस

Mon, 09 Jan 2017 12:44 AM IST
बरेली
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उत्तर प्रदेश को पंडित गोविंद बल्लभ पंत पहला मुख्यमंत्री, जगदीश शरण जैसा विधानसभा अध्यक्ष और राममूर्ति और धर्मदत्त वैद्य, रामसिंह खन्ना जैसे मंत्री देने वाले बरेली जिले में कांग्रेस पिछले 25 सालों से विधान सभा चुनावों में वनवास झेल रही है। एनडी तिवारी जैसे नेता की बरेली पर लगातार ममता रही, उनका ही नहीं, यहां की सांसद रही बेगम आबिदा अहमद जैसी शख्सियत का असर भी जाता रहा। उनके बाद बरेली ने प्रवीण सिंह ऐरन को संसद में चुनकर जरूर भेजा और उनकी पत्नी सुप्रिया ऐरन को शहर का मेयर चुना लेकिन प्रेदश की विधानसभा में पार्टी को इतने लंबे समय से एक भी सीट पर जीत नहीं मिल पायी। जिले में आखिरी बार इस्लाम साबिर 1991 में कांग्रेस के टिकट पर बरेली कैंट से जीते थे, उसके बाद से ही बरेली का खाता नहीं खुला है। वर्ष 1985 कांग्रेस के लिए स्वर्णिम रहा जब इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उठी लहर ने यहां की नौ सीटों में से सात पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। 
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कांग्रेस का सूखा क्या इसबार खत्म होगा? यह बड़ा सवाल प्रदेश से लेकर जिले स्तर पर छाया हुआ है। 27 साल यूपी बेहाल का नारा कितना कारगर होगा यह तो रिजल्ट बताएंगे। इतने सालों में कांग्रेस न तो यहां बने जातीय और धार्मिक ध्रुवीकरण का तोड़ खोज पायी और न ही जमीन पर संघर्ष करने वाला कोई कांग्रेसी चेहरा यहां जमीन बना पाया। विधानसभा चुनाव के लिहाज से कांग्रेसियों को याद करने के लिए 1985 का साल है जिसपर वह गर्व जरूर कर सकते हैं लेकिन इस वर्ष भी सहानुभूति की लहर ने रिकार्ड सीटें दिलाई थीं। तब फरीदपुर से नत्थूलाल विकल, सन्हा से रामेश्वर चौबे, कैंट से रफीक अहमद इलियास रफ्फन, नवाबगंज से चेतराम गंगवार, भोजीपुरा से नरेंद्र पाल सिंह, कांवर से जयदीप सिंह, बहेड़ी से अंबा प्रसाद ने जीत दर्ज की। सिर्फ दो सीटें तब भाजपा के खाते में गई थीं। आंवला से श्याम बिहारी सिंह और बरेली शहर से दिनेश जौहरी ने कांग्रेस लहर में भी जीत दर्ज की थी।
आज कांग्रेस का हाल ये है कि जिले में नौ सीटों में एक पर भी कोई दमदार दावेदार सामने नहीं आया है। टिकट हासिल करने के लिए कुछ लोग पिछले दिनों सक्रिय जरूर दिखायी दिए लेकिन ऐसा एक भी चेहरा नहीं है जिसे पार्टी पहले ही प्रोजक्ट कर जमीनी तैयारी करती दिखती। कुछ मोर्चो पर चुनौती देने की क्षमता रखने वाले भी हालात देख कर बैकफुट पर हैं। 
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कांग्रेस का जीत का स्वर्णिम वर्ष -1985
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विधान सभा-------   विधायक          पार्टी
फरीदपुर----------  नत्थूलाल विकस  कांग्रेस
सन्हा(अब बिथरी)    रामेश्वर चौबे      कांग्रेस
बरेली कैंट             रफीक अहमद     कांग्रेस
नवाबगंज             चेतराम गंगवार      कांग्रेस
भोजीपुरा               नरेंद्र पाल सिंह      कांग्रेस
कांवर( अब मीरगंज) जयदीप सिंह       कांग्रेस
बहेड़ी                 अंबा प्रसाद        कांग्रेस
आंवला------------श्याम बिहारी सिंह   भाजपा
बरेली शहर            दिनेश जौहरी        भाजपा
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