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बोझिल मन से रमजान की विदाई.. बिन खुशियां ईद आई

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जसौली में ईद का चांद देखते लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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शाम को चांद दिखने के बाद शुरू हुआ मुबारकबाद का सिलसिला लेकिन दिन भर सूने रहे बाजार और मुसलमानों के दिल
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ईद से पहले की शाम हमेशा की तरह नहीं मना जश्न

बरेली। रमजान के महीने की शायद पहली बार इतनी मायूसी के माहौल में विदाई हुई। रमजान के अलविदा कहने के साथ कोरोना की वजह से खुलकर ईद न मना पाने का रंज और गाढ़ा दिखा, फिर भी आखिरी रोजे की इस बोझिल शाम को चांद नजर आया तो लोगों में मुबारकबाद का सिलसिला शुरू हो गया। हालांकि हमेशा की तरह ईद से पहले की शाम को न खुशियां नजर आईं न जश्न का माहौल। दिन में बाजार का हाल भी लोगों के सूने मन से अलग नहीं रहा। कहने को तो प्रशासन के शेड्यूल के मुताबिक रविवार को बाजार बंदी का दिन था लेकिन मुस्लिम इलाकों की बंद दुकानों ने यह भी एहसास कराया कि कोरोना से जूझते शहर में मुसलमान भी ईद को पूरी सादगी से मनाने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो चुके हैं।
चांद दिखने के बाद तमाम लोग कोरोना से निजात के लिए दुआएं करते नजर आए। ईद के चांद रात वाली रौनक हर तरफ सिरे से गायब थी। दिन में भी सारे बाजार सुनसान दिखाई दिए और खरीदारी करने के बजाय लोग घरों में सिमटे रहे। कहीं जश्न या खुशी का माहौल तो नहीं दिखा, हालांकि चांद दिखने के बाद शहर के कुछ अलग-अलग इलाकों में पटाखे गूंजने के साथ मस्जिदों के लाउडस्पीकरों पर नातो मनकबत और माहे रमजान की अलविदा की नज्में जरूर गूंजनी शुरू हो गईं। मुस्लिम इलाकों में दिन में थोड़ा-बहुत बाजार खुला तो लोगों ने ईद के लिए जरूरी खरीदारी की लेकिन शाम होते ही शहर भर के बाजारों में सन्नाटा छा गया।
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किला, साहूकारा, कुतुबखाना, कोहाड़ापीर जैसे बेहद व्यस्त रहने वाले बाजारों के साथ मेवा मंडी और सेंवइयों की दुकानें तक बंद रहीं। किले से श्यामगंज तक शाम को कर्फ्यू जैसा माहौल था। सैलानी का मुख्य बाजार भी बंद रहा। यहां ठेला-फड़ जरूर लगे। कुछ लोगों ने फुटपाथ पर ही कुछ रेडिमेड कपड़े, चूड़ियां और कुर्ते पजामे सजा लिए, हालांकि इन फड़ों पर भी खरीदारों की भीड़ नहीं दिखी।

सुन्नी मरकज ने बताया चाश्त की नमाज का तरीका

बरेली। ईद की नमाज इस बार ईदगाह या मस्जिदों में नहीं पढ़ी जाएगी लिहाजा सुन्नी मरकज की ओर से इसके बजाय लोगों को घरों पर नफ्ल नफिल या चाश्त की नमाज अदा करने की हिदायत दी गई है। दरगाह के मरकजी दारुल इफ्ता के मुफ्ती अब्दुल रहीम नश्तर फारूकी ने चाश्त की नमाज का तरीका भी बताया है।
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नियत: नियत की चार रकाअत नमाजे चाश्त की नफ्ल वास्ते अल्लाह तआला के मुंह काबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर..
तकबीरे तहरीमा: अल्लाहु अकबर
पहली रकात: सना. पढ़ें फिर सूरह फातिहा, कोई एक सूरह रूकु और दो सजदे
दूसरी रकात: सूरह फातिहा, कोई एक सूरह रूकु, दो सजदे, अत्तहिय्यात, दुरूद शरीफ दुआ ए मासूरा, (रब्बना आतिना)
तीसरी रकात: सना सूरह फातिहा, कोई एक सूरह, रूकु, दो सजदे
चौथी रकात: सूरह फातिहा, कोई सूरह, रुकू, दो सजदे, अत्तहिय्यात, दुरूद शरीफ, दुआए मासूरा (रब्बना आतिना)। इसके बाद सलाम फेर दें, नमाज पूरी हुई
मुफ्ती फारूकी के मुताबिक यह ख्याल रखना होगा कि दूसरी रकात में अत्तहिय्यात के बाद दुरूद शरीफ और दुआ भी पढ़नी है फिर तीसरी रकात के लिए खड़े होने पर पहले सना पढ़ना है। नमाज से फारिग होने के बाद 34 बार अल्लाहु अकबर पढ़ना है।
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