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बहसों से नहीं कोर्ट से होगा राम मंदिर का फैसला

Thu, 06 Apr 2017 02:00 AM IST
बरेली
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meeting
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अयोध्या में रामजन्म भूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि दोनों समुदाय के लोग आपस में बैठे और बातचीत कर हल निकालें। एक कोशिश बरेली में भी की गई। विजन रूहेलखंड ने इसका जिम्मा उठाया। कुछ मुस्लिम और कुछ हिंदू समुदाय के संभ्रांत और बुद्धिजीवियों को बुलाया गया। आशंका थी कि बहस कहीं बढ़ते- बढ़ते ज्यादा न बढ़ जाए, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। लोगों ने बहुत ही बेबाकी से अपनी राय रखी। अधिकतर लोगाें की राय रही कि जो कोर्ट तय करेगा वहीं मंजूर होगा। 
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विजन रूहेलखंड के अध्यक्ष डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी की अध्यक्षता में गंगाचरण सभागार में गोष्ठी शुरू हुई। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के महिराज ध्वज सिंह और उस्मान अहमद ने कहा कि एक कमेटी बनाएं और तत्वों की जानकारी करें। रु हेलखंड विवि के पीआरओ मो. जहीर ने कहा कि हमारे देश के लोग कोर्ट के आदेश का पालन करना चाह रहे हैं, लेकिन पड़ोसी देश नहीं चाहता। विहिप अध्यक्ष पवन अरोड़ा ने भी अपनी बात रखी। रुहेलखंड मेडिकल कॉलेज के डॉ. खालिद अंसारी ने कहा कि पांच वक्त की नमाज न पढ़ने वाले मस्जिद की बात कर रहे हैं और जो पूजा नहीं करते वे मंदिर वाले बन रहे हैं। पहले हम जहां हैं वहां की समस्याआें को दूर करें फिर अयोध्या के बारे में सोचें। डॉ. शैलेश चौहान ने तर्क दिया कि मंदिर तो कहीं भी बन सकता है लेकिन जो निशानी रामजन्म की मिली है और कोर्ट में सिद्ध हुई है उसे कोई झुठला नहीं सकता और न बदल सकता है। डॉ. सत्येंद्र सिंह ने कोर्ट के निर्णय को ठीक बताया। डॉ. अतुल अग्रवाल ने राम मंदिर, राम सेतु और काल गणना के आधार पर राम को काल्पनिक होने की अवधारणा को नकारा। बरेली अमन कमेटी के खलील कादरी ने दोनों समुदाय से गुजारिश की कि वे एक साथ बैठें और अमन चैन का रास्ता अपनाएं। इस मौके पर कई प्रमुख लोग शामिल रहे। 
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