राम दरबार का सिक्का दिखाते राम गुप्ता
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रोज करते हैं सिक्के की पूजा
राम ने बताया कि 14 वर्ष की उम्र में नाना ने वह उन्हें सिक्का सौंप दिया था। इसे पाने के बाद हृदय परिवर्तन हुआ। गुल्लक के बजाय सिक्के को मंदिर में रखकर पूजा शुरू की। तब से अब तक वह सिक्का घर के मंदिर में ही रखा है। वह प्रतिदिन उसकी पूजा करते हैं। शहर से बाहर जाने पर उसे साथ ले जाते हैं।
वर्ष 1740 में ढाला गया था सिक्का
राम गुप्ता के मुताबिक सिक्के पर उस दौरान की भाषा में वर्ष 1740 अंकित है। सिक्का चांदी और गिलट धातु के मिश्रण से बना है। इस पर सोने की परत चढ़ी है। घिस जाने की वजह से सिक्के का आधा भाग चांदी तो आधा सोने की रंगत से चमकता है। राम के पास वर्ष 1818 का दो आने का भी एक सिक्का है। इसके एक ओर श्रीराम दरबार और दूसरी ओर ऊँ और कमल का फूल अंकित है।