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रक्षाबंधन- अबकी भाई-बहन के स्नेह पर नहीं पड़ेगा भद्रा का साया

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बरेली। भाई बहन के अटूट प्रेम पर इस बार भद्रा का साया नहीं पड़ेगा। भद्रा मुक्त रक्षाबंधन के संयोग को ज्योतिषाचार्या बेहद खास मान रहे हैं। ऐसे में बहनें सूर्योदय से रात 9 बजे तक तक कभी भी भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी। इसके अलावा श्रावणी पूर्णिमा पर सात साल बाद पंचांग के पांच अंगों की श्रेष्ठ स्थिति भी बन रही है।
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ज्योतिषाचार्या पं. नीरज शर्मा के मुताबिक रक्षाबंधन के चार दिन पहले वक्री गुरू मार्गी हो रहे हैं। जो इस पर्व की शुभता को और बढ़ाएंगे। उन्होंने बताया कि 19 वर्षों बाद 15 अगस्त को एक बार फिर श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, बव करण और मकर राशि के चंद्रमा के योग में रक्षाबंधन मनाया जाएगा। इस दिन हयग्रीव जयंती है। चूंकि रात 9.40 से पंचक की शुरुआत हो रही है, इसलिए रात नौ बजे तक ही राखी बांधने का विधान है। उन्होंने बताया कि पूर्णिमा तिथि पर उत्तरार्ध के भाग में पंचक के नक्षत्र का रात्रि अनुक्रम त्योहार की शुभता को पांच गुना बढ़ा देता है। इस दिन सुबह 6:02 से शाम 5:59 बजे तक पूर्णिमा रहेगी। दोपहर 1:30 से 3 बजे तक राहुकाल होने से शुभ कार्य करना वर्जित रहेगा।
क्यों निषेध है भद्रा में शुभ कार्य
भद्रा में शुभ कार्य वर्जित होने के पीछे कई मान्यताएं हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक पहली मान्यता है कि भद्रा के उग्र स्वभाव के कारण ब्रह्माजी ने पंचाग में इनका नाम विष्टी करण रखा। दूसरी, भद्रा भगवान सूर्य की पुत्री और शनिदेव की बहन है। जिस तरह शनि का स्वभाव क्रूर और क्रोधी है, उसी प्रकार से भद्रा का भी है। तीसरी मान्यता है कि रावण की बहन ने भद्राकाल में ही अपने भाई की कलाई में रक्षासूत्र बांधा था जिससे रावण का सर्वनाश हुआ था।
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मंत्र का जप कर बांधे राखी
‘येन बद्धो बली राजा, दानवेन्द्रो महाबल:।
तेन त्वां मनुबध्नामि रक्षंमाचल मा चल।
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