बरेली। रक्षाबंधन पर बसों की उपलब्धता को लेकर रोडवेज प्रशासन की ओर किए गए दावे खोखले साबित हुए। सवारियों को बसें न मिलने से वह बहुत परेशान हुए। खास तौर से वह बहने जिनके लिए रात से बस यात्रा मुफ्त की गई थी। वह इस सुविधा का लाभ लेने के लिए रात में अपने घरों को जाने के लिए निकली थीं। इन महिलाओं ने मुख्यमंत्री आदित्य नाथ योगी का आभार तो जताया, साथ ही यह भी कहा कि बसें भी समय पर उपलब्ध होती तो और बेहतर होता।
शासन ने रक्षाबंधन के मौके पर बहनों को अपने घर जाने के लिए पूर्व संध्या पर रोडवेज बसों से यात्रा 24 घंटे के लिए मुफ्त कर दी है। यह सुविधा बृहस्पतिवार की रात तक रहेगी। इस सफर लाभ उठाने के लिए सैकड़ों महिलाएं मध्य रात्रि से पहले ही अपने परिवार के साथ रोडवेज स्टेशन पर पहुंचना शुरू हो गई थी। रात 12 बजते ही परिचालकों ने आवाज लगाना शुरू किया कि महिलायों की फ्री यात्रा शुरू हो गई है। इतना सुनते ही यात्री बसों की ओर भाग पड़े।
दिल्ली दिशा की ओर से जाने वाली कई बसें तुरंत की तुरंत फुल हो गई। जिन्हें रवाना भी कर दिया गया, मगर बदायूं कासगंज दिशा की ओर जाने के लिए बसें उपलब्ध न होने से उन्हें परेशान होना पड़ा। सिर्फ शुरू में एक ताज डिपो की बस जाते हुए सवारियां उसमें ही भर गई। इसके बाद एक भी बस स्टेशन पर रात्रि एक बजे उपलब्ध नहीं थी। जो बसें बदायूं के लिए प्लेटफार्म पर खड़ी थीं उनके बारे में वहां के स्टाफ से पता किया गया तो उन्होंने बताया कि वह बसें सुबह जाएंगी। रात में जाने के लायक नहीं हैं। जब बाहर से बसें आएंगी तभी तो जाएंगी। लिहाजा सवारियां मायूस बाहर से आने वाली बसों के इंतजार में प्लेट फार्म पर या वहीं सड़क किनारे बैठ गईं। कुछ यात्री तो प्लेटफार्म ही चादर बिछा कर लेट ही गए।
एक डेढ़ घंटा पहले से स्टेशन पर खड़ी बसों के बारे में रोडवेज स्टाफ का कहना था कि जो बसें अभी खड़ी हैं उनके चालक परिचालक थोड़ा आराम के बाद ही जाएंगे। गरज यह कि रात 12 बजे से एक बजे तक स्टेशन पर कोई ऐसी बसें तो नहीं थीं जो जाने वाली हों। बाहर से आने वाली बसें जरूर थोड़ी सवारियां ले जा रहीं थीं। इसी बीच सवारियों के शोर शराबे पर एक बस बदायूं के लिए रवाना हो सकी। यहीं नहीं अलीगढ़, मथुरा और आगरा, किच्छा, हल्द्वानी की सवारियां भी बसों के इंतजार में रहीं। बस स्टेशन पर पूछ ताछ कार्यालय के अलावा कोई स्टाफ नजर नहीं आया।
यहां से बसें न होने के कारण जो भी बसें बाहर से आती सवारियों के बस में चढ़ने की होड़ लग जाती। कोई खिड़कियों से घुसने की कोशिश करता, नहीं तो अपना बैग तो रख ही देता। कुछ अपने बल पर मेन गेट के सब को दाएं बाएं करते बस चढ़ता नजर आता। यहां से अधिकांश सवारियां तो दिल्ली रूट की रहीं। इसके अलावा पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, हल्द्वानी, अलीगढ़ आदि की रहीं। वहीं दिल्ली रूट की एसी बसें भी फुल रहीं।
इसमें बदायूं के शोभा शर्मा का कहना था कि योगी जी को धन्यवाद है उन्होेंने महिलाओं का ख्याल रखा, मगर न मिलने से महिलाओं को परेशनी उठानी पड़ रही है।
इसी तरह कासगंज की सरिता देवी का कहना है जब फ्री करी थी तो बसें भी होती। क्या फायदा आधी रात में यहां परेशान हो रहे हैं। इससे तो दिन में ही चले जाते है।