जिन्हे आगे बढ़ाया, अब वही बने जान के दुश्मन
सत्ता की करीबी और जमीनों पर कब्जे करके राजीव राना ने जो अकूत संपत्ति बनाई, अब वही उसके लिए नासूर बन गई है। राजीव का घर और होटल पुलिस प्रशासन ने बुलडोजर से गिरवा दिया। बची संपत्ति का चिह्नीकरण किया जा रहा है तो परिवार में भी इसी संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया है।
पीलीभीत बाइपास पर कब्जे की कोशिश में हुए गोलीकांड में राजीव राना और उसके भाई हरिओम दोनों को आरोपी बनाया गया था। राजीव का घर और होटल पुलिस प्रशासन ने बुलडोजर से गिरा दिया था।
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इज्जतनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज की गई थी जिसमें गंभीर धाराओं में 35 लोगों पर चार्जशीट लग चुकी है। इसमें राजीव समेत अन्य आरोपी काफी समय जेल में रहकर जमानत पर बाहर आ चुके हैं। इज्जतनगर थाने में ही राजीव राना, उसके परिजनों व साथियों के खिलाफ गैंगस्टर की नई रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इसकी विवेचना सुभाषनगर थाना प्रभारी धर्मेंद्र कुमार कर रहे हैं।
इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए राजीव व उसके भाई-भतीजे कोर्ट से स्टे ले आए हैं। चार्जशीट के बाद ही इन छह लोगों की गिरफ्तारी की जा सकेगी। सूत्रों के मुताबिक गैंगस्टर की प्रक्रिया के तहत राजीव व उसके साथियों की अवैध संपत्ति का चिह्नीकरण भी किया जा रहा है।
विवाद के पीछे साजिश का अंदेशा
राजीव और उसके भाई के बीच संपत्ति को लेकर विवाद चर्चा का विषय बना है। हालांकि एक भाई ने दूसरे को संपत्ति से कैसे बेदखल कर दिया। इसे लेकर भी चर्चा हो रही है। चर्चा ये भी है कि कहीं यह संपत्ति को जब्त होने से बचाने को लेकर की जा रही तैयारी तो नहीं है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि भाइयों को स्थापित करने में राजीव का हाथ रहा था, जब गोलीकांड में सब भाई साथ थे तो अब विवाद क्यों हो रहा है। कई सवालों के जवाब विवेचना में सामने आएंगे।