बरेली। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाएं निखारने की दिशा में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अहम निर्णय लिया है। भाजपा सरकार ने इस दिशा में पूर्ववर्ती कांग्रेेस सरकार की ‘राजीव गांधी खेल अभियान’ को बंद कर दिया है। अब इसकी जगह नई योजना ‘खेलो इंडिया’ लागू करते हुए इसे वृहद् रुप दिया गया है। नई खेल योजना उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में तीन चरणों में लागू की जाएगी।
प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह की सरकार में ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए राजीव गांधी खेल अभियान लागू किया गया था। युवा कल्याण विभाग से संचालित अब ये योजना ‘खेलो इंडिया’ के नाम से संचालित होगी। नई योजना के पहले चरण में ग्राम स्तर से जिला स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। इसमें जनपद स्तर की खेल प्रतियोगिता में शहरी क्षेत्र के खिलाड़ी भी हिस्सा ले सकेंगे। द्वितीय चरण में ग्रामीण क्षेत्र में खेल मैदान और कस्बों में स्टेडियम बनेंगे। हालांकि इनकी संख्या कितनी होगी। इसकी गाइड लाइन तय नहीं है। तृतीय चरण में जनपद स्तर पर फुटबाल, वॉलीबाल, कबड्डी, बैडमिंटन, जूडो कराटे, भारोत्तोलन और टेबिल टेनिस खेल प्रतियोगिता में प्रत्येक जनपद चैंपियन खिलाड़ी को स्कॉलरशिप दी जाएगी। स्कॉलरशिप की राशि कितनी होगी ये अभी तय नहीं है। प्रत्येक खेल के खिलाड़ियों की उम्र को लेकर दिशा निर्देश नहीं आए हैं। न ही अब तक योजना में बजट भेजा गया है। इस फेरबदल के चलते इस साल ग्राम पंचायत, ब्लाक और जिला स्तर पर कोई खेल प्रतियोगिता नहीं हो पाई है।
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राजीव गांधी खेल योजना में पांच खेल मैदान विकसित करने थे। प्रत्येक मैदान के लिए 1.75 लाख का बजट निर्धारित किया गया था। केंद्र में नई सरकार ने ये योजना बंद कर दी है। इसके स्थान पर ‘खेलो इंडिया’ योजना लागू की गई है। ये तीन चरणों में है। नई योजना में खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराने के लिए शासन की गाइड लाइन का इंतजार है। विवेक श्रीवास्तव, जिला युवा कल्याण अधिकारी