Rajesh's saffron storm, weak mujahid
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
कभी मुस्लिम प्रत्याशियों को जिताने वाली बरेली कैंट सीट पर राजेश अग्रवाल ने एक बार फिर कमल खिला दिया। आखिरी दो चरण से पहले आगे चल रहे कांग्रेस के मुजाहिद हसन के एजेंटों ने जब देखा कि अब भाजपा के गढ़ वाले कुछ हजार वोट बाकी बचे हैं तो मगणना स्थल छोड़ कर चले आए। इसबार इकलौते मुस्लिम प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस और सपा गठबंधन से मुजाहिद हसन खां मैदान में उतरे थे। माना जा रहा था कि मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण के साथ अगर बसपा प्रत्याशी राजेंद्र गुप्ता ने भाजपा प्रत्याशी के वोट बांट लिए तो कांग्रेस जीत जाएगी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया। राजेंद्र का लोगों ने प्रचार में तो साथ दिया लेकिन ध्रुवीकरण की हवा में उनके कई वोट उड़ कर राजेश के पास चले गए।
2012 के चुनाव में जब सपा की लहर थी तो भी कैंट से भाजपा के राजेश अग्रवाल जीते थे। इसकी वजह मुस्लिम वोटों का बसपा और आईएमसी में बंटवारा रहा था तो हिंदू वोट भी बंटे थे लेकिन उतने नहीं जितने इसबार एकजुट दिखाई दे रहे हैं। इस चुनाव में सिर्फ एक मुस्लिम प्रत्याशी मुजाहिद हसन खां सपा कांग्रेस से थे उन्होंने आखिरी वक्त तक भाजपा के दिग्गज राजेश अग्रवाल का पीछा भी किया लेकिन 13 हजार वोटों से हार गए। राजेंद्र गुत्पा जो खुद हिंदू वादी नेता के रूप में चर्चित रह चुके हैं उनके साथ बसपा के कैडर वोटों को मिला कर राजनीतिक विश्लेषक यही गणित बना रहे थे कि अगर हिंदू वोट राजेंद्र गुप्ता ने बांटा तो मुजाहिद की सीट निकल सकती है लेकिन लहर ही ऐसी थी कि हिंदू वोट एकजुट पड़े और राजेश को जीत में मदद मिली।