फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कैंसर पीड़ित पत्नी को अस्पताल में छोड़ रेलवे कर्मी गायब

Sat, 04 Nov 2017 01:36 AM IST
बरेली।
विज्ञापन
विज्ञापन
 कैंसर पीड़ित पत्नी के इलाज ने घर में फाकाकशी के हालात पैदा कर दिए तो रेलवे कर्मचारी इस कदर टूट गया कि बुधवार रात पत्नी को अस्पताल में छोड़कर गायब हो गया। उसके चारों बच्चे उस वक्त घर पर सो रहे थे। सुबह जागे तो बच्चों ने समझा कि पापा अस्पताल में मम्मी के पास होंगे लेकिन जब पता चला कि वह वहां भी नहीं हैं तो बच्चे परेशान हो गए। गुरुवार शाम तक बच्चों को खाना भी नसीब नहीं हुआ। शुक्रवार सुबह जब पड़ोसियों को बच्चों के भूख से तड़प रहे होने की बात चली तो उन्होंने बच्चों को खाना खिलाया और फिर सूचना देकर किच्छा से उनके दादा को बुलाया।  
विज्ञापन

पचास वर्षीय रामौतार की शादी लालकुआं की मीनू से 22 साल पहले हुई थी। रामौतार रेलवे अस्पताल में कर्मचारी हैं। उनके चार बच्चे गोपी (18), सोनी (16), मोनी (14) और सोनू (12) हैं। घर पर मौजूद सोनी ने बताया कि डेढ़ साल पहले उनकी मां की तबीयत खराब रहने लगी। चार महीने के इलाज के बाद पता चला कि मां को कैंसर है। इलाज के लिए मीनू को लखनऊ, मुंबई, दिल्ली, हरियाणा के कई अस्पतालों में दिखाया गया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। तीन महीनों से मीनू इज्जतनगर स्थिति रेलवे अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। मीनू के इलाज पर भारी भरकम खर्च ने रामौतार को तोड़ दिया है। घर में फाकाकशी की नौबत आ गई है। इन हालातों ने रामौतार को इस कदर बेबस कर दिया कि वह बुधवार रात पत्नी-बच्चों को बिना बताए कहीं चले गए। तब से उनका कुछ पता नहीं है। 

‘उस रात बहुत रोये थे पापा’ 
रामौतार की बेटी सोनी ने बताया कि बुधवार को लालकुआं से उनके नाना रमेश रेलवे अस्पताल आए थे। बोली, नाना ने पापा पर मां का इलाज नहीं कराने का आरोप लगाकर बहुत झगड़ा किया था। इससे पहले से तनाव में चल रहे पापा टूट से गए। रात में घर लौटने के बाद उन्होंने यह बात हम सभी भाई-बहनों को बताई। पूछा- क्या मैं तुम्हारी मां का इलाज नहीं करा रहा हूं। हमलोगों ने बहुत समझाया लेकिन पापा रोते रहे।
विज्ञापन


बच्चों की पढ़ाई भी छूट गई 
कॉलोनी के मिंटू सिंह ने बताया कि इन बच्चों की एक साल से पढ़ाई भी छूट चुकी है। गोपी आठवीं में पढ़ रहा था, सोनी सातवीं में, मोनी और सोनू छठवीं में पढ़ रहे थे, लेकिन अब सभी घर पर रहते हैं। उनके दादा का फालिज का अटैक पड़ने से शरीर का आधा हिस्सा काम नहीं कर रहा है। अब बच्चों का कोई सहारा नहीं है। पुलिस को सूचना देने के बाद चीता पुलिस अस्पताल में मोनी से मिलने पहुंची थी। फिलहाल थाने में गुमशुदगी भी दर्ज नहीं हुई है।    
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें