बरेली। केंद्र सरकार के आम बजट 2025-26 को डेढ़ माह से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन रेलवे की परियोजनाओं को लेकर स्थिति अब तक साफ नहीं हो सकी है। इसका एक कारण अब तक रेलवे की पिंक बुक का जारी न होना है। अमूमन बजट जारी होने के एक सप्ताह के अंदर पिंक बुक आ जाती है।
पिंक बुक में रेलवे की सभी परियोजनाओं और उनके लिए बजट आदि का पूरा ब्योरा होता है। इस बार अब तक पिंक बुक न आने के कारण पुरानी परियोजनाओं पर काम शुरू होने को लेकर भी संशय बना हुआ है। डीआरएम इज्जतनगर वीणा सिन्हा का कहना है कि पिंक बुक का इंतजार है। पिंक बुक आने के बाद ही परियोजनाओं को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी। संवाद
इन परियोजनाओं पर होना हैं काम
बरेली-चंदौसी और भोजीपुरा-बरेली सिटी स्टेशन के बीच रेल लाइन का दोहरीकरण
बरेली-चंदौसी रेल लाइन के दोहरीकरण को 2023-24 में स्वीकृति मिल चुकी है। इस लाइन की अनुमानित लागत 2,286 करोड़ है। केंद्र सरकार ने 2024-25 के रेल बजट में 178 किमी की बरेली-चंदौसी-अलीगढ़ के साथ 45 किमी चंदौसी- मुरादाबाद रेल लाइन के लिए भी बजट स्वीकृत कर दिया, लेकिन अब तक रेल लाइन के दोहरीकरण का काम शुरू नहीं हो सका है। दूसरी ओर भोजीपुरा-बरेली सिटी स्टेशन के बीच रेल लाइन का दोहरीकरण होना है। इसके लिए 2023-24 में सर्वे भी हो चुका है। रेलवे कोर्ट की ओर से दोहरीकरण को स्वीकृति भी मिल चुकी है, लेकिन अब तक स्थिति साफ नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि पिंक बुक आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी।
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एसी मेंटीनेंस शेड और वॉशिंग लाइन का काम भी फंसा
बरेली जंक्शन पर एसी मेंटीनेंस शेड और वाशिंग लाइन के विस्तार का काम प्रस्तावित है। एसी मेंटीनेंस शेड के लिए 17 करोड़ की टोकन मनी भी जारी हो चुकी है, लेकिन काम शुरू नहीं हो सका है। 20 कोच की वाशिंग लाइन का 26 कोच में विस्तार किया जाना है, लेकिन पिंक बुक न आने के कारण इसको लेकर भी अब तक स्थिति साफ नहीं हो सकी है।
350 करोड़ से होना है जंक्शन का सुंदरीकरण
जंक्शन के सुंदरीकरण के काम को लेकर भी अब तक स्थिति साफ नहीं हो सकी है। अब तक यहां छह प्लेटफॉर्म है। इनकी संख्या बढ़ाकर 10 की जानी है। पुराना के स्थान पर नया भवन भी प्रस्तावित है। इसके अलावा विभिन्न विभागों के कार्यालय भी बनाए जाने हैं। बजट 2025-26 में बरेली को लेकर नई घोषणा नहीं की गई, लेकिन पुराने कार्यों को गति देने की बात कही गई है। पिंक बुक न आने के कारण पुराने प्रस्तावित कार्यों को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हो पा रही।