बरेली। जंक्शन के इंक्वायरी आफिस के कर्मचारियों की लापरवाही का खामियाजा यात्रियों को भुगतना पड़ा। जल्दी में ट्रेन पकड़ने की वजह से कई यात्री चुटैल हो गए, अनेक यात्रियों की ट्रेन छूट गई। छूटे हुए यात्रियों ने इंक्वायरी पर हंगामा किया जिससे इंक्वायरी बाबू को जीआरपी/आरपीएफ बुलानी पड़ी जिन्होंने यात्रियों को शांत किया।
तीन साल बाद चली दो दिन पहले लखनऊ सहारनपुर पैसेंजर छोटी-छोटी स्टेशनों के यात्रियों के लिए वरदान है। लंबे समय से यात्री ट्रेन को चलाने के लिए मांग करते रहे हैं, लेकिन जंक्शन के इंक्वायरी बाबू ट्रेन को ही भूल गए। उन्होंने रूटीन की ट्रेनों की तरह घोषणा करने में लखनऊ-सहारनपुर पैसेंजर को शामिल नहीं किया है। शुक्रवार को सुबह नौ बजे लखनऊ से चलकर सहारनपुर जाने वाली पैसेंजर जंक्शन के प्लेटफार्म तीन पर आकर खड़ी हो गई। ट्रेन करीब पांच मिनट तक खड़ी रही। यात्री प्लेटफार्म दो पर इंतजार कर रहे थे। ट्रेन जब चलने को हुई तो इंक्वायरी बाबुओं का ट्रेन की घोषणा करने की याद आई। उन्होंने ट्रेन के खड़े होने की घोषणा की तो यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। वह ट्रेन पकड़ने के लिए भागने लगे। महिलाओं समेत कई यात्री गिरकर घायल हो गए। अनेक यात्रियों की ट्रेन छूट गई। इसके बाद यात्री इंक्वायरी आफिस पहुंचे। यात्रियों की भीड़ देखकर इंक्वायरी बाबू के भी हाथ पांव फूल गए। उन्होंने जीआरपी और आरपीएफ को बुला लिया। पुलिस ने किसी तरह से यात्रियों को समझाया, जिसके बाद यात्री शांत हुए।
छह सितंबर को भी छूट गई थी यात्रियों की ट्रेनें
इंक्वायरी की लापरवाही के अनेक उदाहरण हैं, जिससे यात्रियों की ट्रेन छूटी है। छह सितंबर को रेलवे ने हापुड़ से लखनऊ तक सुबह 9:40 से शाम 5:20 बजे तक आठ घंटे का ब्लाक लेकर पटरियां और स्लीपर बदले थे। इज्जतनगर मंडल ने काठगोदाम लखनऊ एक्सप्रेस को दो घंटे देरी से चलाने का शेड्यूल जारी किया था। जंक्शन पर ट्रेन निर्धारित समय 3:15 के बजाए 5:15 बजे आनी थी। यात्री भी निश्चिंत होकर ट्रेन के समय से जंक्शन पहुंचे, लेकिन ट्रेन 15 मिनट पहले ही जंक्शन से लखनऊ की ओर जा चुकी थी। कई यात्रियों ने ट्रेन छूटने पर इंक्वायरी आफिस पर बवाल किया था।