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UP News: बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के भूमि अधिग्रहण पर उठे सवाल, हाईकोर्ट पहुंचा मामला

Mon, 16 Sep 2024 05:26 PM IST
बरेली ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए  पीलीभीत के बीसलपुर निवासी एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। 

 
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Land acquisition - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के लिए भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठ रहे हैं। एक मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसमें कहा गया है कि 11 जनवरी को अधिग्रहण की अधिसूचना दिल्ली एनसीआर के ऐसे समाचार पत्रों में प्रकाशित कराई गई, जिनका प्रसार जिले में न के बराबर है। जिन किसानों की जमीन अधिग्रहीत की जानी थी, वे अधिसूचना को पढ़ नहीं सके। 

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उनको इसका पता तब लगा, जब सर्वे करने के लिए निजी एजेंसी के कर्मचारी खेत तक पहुंच गए। किसान आपत्ति करते, उससे पहले ही एनएच एक्ट की धारा 3(डी) की अधिसूचना हो गई। आपत्ति की अवधि गुजर गई। किसानों को अपना पक्ष रखने के लिए कोई मौका नहीं मिला। इसलिए अब नए सिरे से अधिसूचना जारी किए जाने की जरूरत है। पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पीलीभीत जिले के बीसलपुर निवासी एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। 

मुआवजे के लिए खेल रचे जाने का अंदेशा 
बरेली-सितारगंज हाईवे की तर्ज पर बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे के लिए भूमि अधिग्रहण में भी अधिक मुआवजा लेने के लिए खेल रचे जाने का अंदेशा है। हालांकि, अभी तक किसी मामले में कोई भुगतान नहीं हुआ है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि एक-दो व्यक्ति ऐसे हैं, जो अधिक मुआवजा लेने के मामले में पेशेवर रहे हैं। 

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इन पेशेवर लोगों ने अधिग्रहण की पहली अधिसूचना के बाद बरेली-सितारगंज हाईवे के किनारे उन्हीं गाटा संख्या की जमीन खरीदी थी, जिनका अधिग्रहण होना था। अब पता यह लग रहा है कि इनमें से दो व्यक्तियों ने बीसलपुर-शाहजहांपुर हाईवे पर भी भूमि के सौदे किए हैं। बैनामे भी अधिसूचना जारी होने के बाद कराए गए हैं। अगर पहली अधिसूचना के बाद हुए बैनामों की छानबीन होती है तो ऐसे लोगों के नाम खुल सकते हैं।
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चार बीघा जमीन हाईवे के एलाइनमेंट के दायरे में आई थी। सर्किल रेट के अनुसार पांच लाख रुपये प्रति बीघा जमीन की कीमत थी, लेकिन कमीशन नहीं देने की वजह से लेखपाल ने ढाई लाख रुपये बीघा जमीन की कीमत लगाई। - अब्दुल रहीम
हाईवे के दायरे में एक एकड़ जमीन आई थी। लेखपालों ने जमीन की कीमत सर्किल रेट के आधार पर नहीं आंकी और मुआवजा 41 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया गया। जबकि सर्किल रेट के अनुसार 72 लाख रुपये मुआवजा मिलना चाहिए था। - एजाज अहमद
लेखपालों ने सर्वे के दौरान सर्किल रेट के आधार पर जमीन की कीमत नहीं आंकी। सात बीघा जमीन एलाइनमेंट के दायरे में आई थी। इस पर 11 लाख रुपये मुआवजा मिला। जबकि, सर्किल रेट के अनुसार भूमि की कीमत 42 लाख रुपये बन रही है। - समीम खां
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