चिकित्सकों ने ट्रूनेट जांच के बाद कंफ र्मेटिव जांच नहीं कराने की जताई आशंका
बरेली। कोविड संक्रमण की दूसरी लहर की आशंका को स्वास्थ्य विभाग के जिम्मदार सही साबित करने में जुटे हुए हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च यानी आईसीएमआर से जारी जांच के नियमों को न मानने से ट्रूनेट जांच में संक्रमित मिले करीब 30 फीसदी लोगों को बेवजह तकलीफों से गुजरना पड़ा। जिम्मेदार अब भी नहीं चेते हैं लिहाजा, संक्रमितों की तादाद और स्वस्थ लोग संक्रमित होने का दर्द सहने को बेबस हैं। यह हम नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी कोविड रिपोर्ट का दावा है। जानकारों ने ट्रूनेट जांच में संक्रमित मिले लोगों की आरटीपीसीआर जांच कराने का सुझाव दिया है।
कोविड जांच की तादाद बढ़ाने के लिए सरकार ने सभी संभावित तरीकों को लागू कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में ट्रूनेट जांच जुलाई में शुरू हुई थी। ताकि ज्यादा से ज्यादा संक्रमित ट्रेस हो सकें और अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की तत्काल जांच की जा सके। चिकित्सकों के मुताबिक इस रैपिड जांच को मंजूरी देने के साथ ही, आईसीएमआर ने आरटीपीसीआर कंफर्मेटिव जांच कराने को कहा था। वजह थी कि ट्रनेट जांच में हर तरह के वायरस डिटेक्ट हो जाते हैं। अगर संबंधित व्यक्ति के शरीर में कोविड-19 से मिलता जुलता भी कोई वायरस है तब भी रिपोर्ट पॉजिटिव आनी तय है। कोविड-19 वायरस को ट्रेस करने की सेंसटिविटी महज 70 फीसदी ही मानी जाती है। जिसकी वजह से आरटीपीसीआर जांच कराने का सुझाव दिया था। मगर, स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुरुआत में ट्रूनेट से पॉजिटिव मिले कुछेक सैंपल जांच को भेजे मगर फिर यह कवायद ठप हो गई। ट्र्रूनेट जांच में पॉजिटिव मिले लोगों को सौ फीसदी संक्रमित मानकर रिकॉर्ड दुरुस्त कराने और संक्रमित को संस्थागत आइसोलेट किया जाने लगा। बताया जाता है कि शुरुआत में जांच को भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आगे से आरटीपीसीआर जांच करानी बंद की थी।
ट्रूनेट की जांच में 1189 मिले संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो ट्रनेट जांच जुलाई से जिला अस्पताल में शुरू हुई। जिसके बाद भोजीपुरा स्थित कोविड एल-2 अस्पताल में भी यह जांच सुविधा शुरू हुई। अब तक 9878 सैंपल की जांच हो चुकी है। जिसमें से 1189 व्यक्ति संक्रमित मिले हैं। इन सभी को कोविड नियमों के तहत होने वाली तकलीफदेह प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। वहीं, चिकित्सकों की मानें तो ट्रूनेट की सेंसटिविटी 70 फीसदी ही होने की वजह से इसमें से करीब 30 फीसदी ऐसे लोग भी परेशान हुए जो संक्रमित नहीं रहे होंगे।
हैरत.. आरटीपीसीआर जांच में ट्रूनेट से चार गुना कम मिल रहे संक्रमित
दो जनवरी के रिकॉर्ड के मुताबिक जिले में अब तक आरटीपीसीआर की 172733 सैंपल की जांच में 6267 लोग संक्रमित मिले और पॉजिटिविटी रेट 3.6 रही। ट्रूनेट की 9878 सैंपल की जांच में 1189 लोग संक्रमित मिले और पॉजिटिवटी रेट 12 फीसदी रही। एंटीजन की 271799 सैंपल की जांच में 6669 लोग पॉजिटिव मिले और पॉजिटिविटी रेट 2.4 फीसदी रही। आईसीएमआर की गाइडलाइन के मुताबिक आरटीपीसीआर और एंटीजन की पॉजिटिव रिपोर्ट करीब शत प्रतिशत सही होती है।
बेहद जरूरी है कंफर्मेटिव जांच
संक्रामक रोग चैप्टर के अध्यक्ष रहे डॉ. अतुल अग्रवाल के मुताबिक एंटीजन जांच और ट्रूनेट दोनों ही रैपिड जांच हैं। एंटीजन की निगेटिव और ट्रूनेट की पॉजिटिव रिपोर्ट की प्रामणिकता करीब 70 फीसदी ही मानी गई है। लिहाजा, दोनों ही स्थितियों में कोविड-19 की पुष्टि है या नहीं यह मानने से पहले आरटीपीसीआर या एंटीजन से जांच करानी बेहद जरूरी है। ऐसा न होने पर एंटीजन से निगेटिव मिला संक्रमित व्यक्ति संक्रमण फैला सकता है और ट्रूनेट से पॉजिटिव मिला व्यक्ति निगेटिव होने के बावजूद परेशानी का सामना करेगा।
शुरुआत में हमारे पास ट्रूनेट की सिर्फ प्रारंभिक जांच किट ही उपलब्ध थी जिसकी वजह से कन्फर्मेटिव जांच के लिए सैंपल आईवीआरआई भेजे जा रहे थे। अब कन्फर्मेटिव जांच किट भी मिल गई है इसलिए सैंपल नहीं भेजे जा रहे हैं। एंटीजन की रिपोर्ट निगेटिव मिलने पर लक्षण दिखाई देने पर आरटीपीसीआर के लिए सैंपल लिया जा रहा है। - डॉ. सुधीर गर्ग, सीएमओ