बरेली। दुर्घटनाग्रस्त मरीजों को रेफर के सफर से निजात दिलाने के लिए अब जनप्रतिनिधि भी आगे आए हैं। घायलों को जिले में ही बेहतर इलाज मिले, इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर ट्रॉमा सेंटर की मांग उठाई है। तीन सौ बेड अस्पताल समेत जिला अस्पताल के ट्रॉमा विंग में जरूरी संसाधन मुहैया कराने के लिए कहा है। पुलिस विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष अक्तूबर तक 974 गंभीर हादसों में 406 लोग जान गंवा चुके हैं। मृतकों में कई ऐसे रहे, जिन्हें तत्काल बेहतर इलाज नहीं मिल सका। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया। अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए ट्रॉमा सेंटर बनाए जाने के लिए क्रमवार खबरें प्रकाशित कीं। इसका संज्ञान लेकर अब जनप्रतिनिधि भी इस मुहिम से जुड़ गए हैं। बुधवार को उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित पत्र भेजकर जिले में आधुनिक सुविधाओं से लैस ट्रॉमा सेंटर संचालित किए जाने की मांग की है।
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तीन सौ बेड अस्पताल को बनाएं ट्रॉमा सेंटर
आंवला सांसद नीरज मौर्य ने मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कहा है कि बीते दिनों उन्होंने तीन सौ बेड अस्पताल का जायजा लिया था। करीब 70 करोड़ की लागत से अस्पताल बना और करीब 25 करोड़ के उपकरण लगे हैं। दोनों ही धूल फांक रहे हैं। उन्होंने अस्पताल में जरूरी मानव संसाधन उपलब्ध कराकर ट्रॉमा सेंटर के तौर पर संचालन कराने की मांग की है।
घायलों को लखनऊ ले जाने में लगता है काफी वक्त
बिथरी चैनपुर विधायक डॉ. राघवेंद्र शर्मा के मुताबिक घायलों को लखनऊ या अलीगढ़ ले जाने में काफी वक्त बर्बाद होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में जिला अस्पताल से रेफर घायलों को निजी अस्पताल में निशुल्क इलाज की सुविधा मुहैया कराने की पैरवी की है। इसके बिल का भुगतान शासन से हो।
फरीदपुर के पुरानी सीएचसी को ट्रॉमा सेंटर बनाने की मांग
फरीदपुर विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में तीन सौ बेड अस्पताल में या फिर फरीदपुर के पुराने सीएचसी भवन में ट्रॉमा सेंटर संचालन की मांग की है। कहा है कि फरीदपुर सीएचसी हाईवे पर है। बीते दिनों यहां आसपास गंभीर दुर्घटनाएं भी हुईं। अगर ट्रॉमा सेंटर होता तो लोगों की जान का जोखिम कम होता।
मानव संसाधन उपलब्ध कराकर संचालित कराएं सेंटर
नवाबगंज विधायक डाॅ. एमपी आर्य ने बताया कि बरेली मेडिकल हब है, लेकिन सरकारी ट्राॅमा सेंटर न होने से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के घायलों को भटकना पड़ता है। 300 बेड अस्पताल में उपकरण हैं। मॉड्यूलर ओटी बन जाए तो ट्रॉमा सेंटर संचालित किया जा सकता है। जिला अस्पताल के पुराने परिसर में निर्मित ट्रॉमा विंग में मानव संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी की है।