पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नए पर्यटन सत्र के दौरान सैलानियों को जंगल की सैर कराने की जिम्मेदारी अनुभवी नेचर गाइडों को दी जाएगी। गाइडों के चयन की प्रक्रिया में बदलाव करते हुए इस बार लिखित परीक्षा की व्यवस्था समाप्त कर दी गई है।
अब पीटीआर में पहले काम कर चुके गाइडों को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं, पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों की बेहतर जानकारी देने के लिए 100 नेचर गाइड और 100 सफारी वाहन चालकों का आठ दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शुरू किया गया है।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व का पर्यटन सत्र एक नवंबर से शुरू होने जा रहा है। इसे लेकर रिजर्व प्रशासन तैयारियों में जुटा है। महोफ रेंज के प्रसिद्ध इको टूरिज्म स्थल चूका बीच पर हटों का रंग-रोगन कराया जा रहा है। पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ जंगल सफारी को सुरक्षित और जानकारीपूर्ण बनाने पर जोर दिया जा रहा है। महोफ रेंज के मुस्तफाबाद में 17 से 24 अक्तूबर तक प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है। इसके लिए पुणे से दो विशेषज्ञों को बुलाया गया है।
विशेषज्ञ नेचर गाइडों को जंगल, वन्यजीवों और पक्षियों से जुड़ी जानकारी दे रहे हैं। वहीं, सफारी वाहन चालकों को जंगल में वाहन संचालन और वन्यजीवों की साइटिंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य यह है कि सैलानियों को जंगल सफारी के दौरान वन्यजीवों के बारे में सही जानकारी मिले और उनकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा जाए।
पिछले पर्यटन सत्रों में लिखित परीक्षा कराकर वरीयता क्रम के आधार पर गाइडों का चयन किया जाता था। इस बार यह व्यवस्था बदल दी गई है। अब उन लोगों को तरजीह दी जा रही है, जो पहले भी पीलीभीत टाइगर रिजर्व में नेचर गाइड के रूप में काम कर चुके हैं।
डीएफओ मनीष सिंह का कहना है कि नए पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए नेचर गाइडों और सफारी वाहन चालकों का विशेष प्रशिक्षण कराया जा रहा है। पुणे से आए विशेषज्ञ संवाद कौशल, वन्यजीवों की जानकारी और जंगल सफारी के दौरान सुरक्षा संबंधी सावधानियों का प्रशिक्षण दे रहे हैं। संवाद