बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग में बुधवार को विद्यार्थियों ने मनोस्थिति का पता लगाने के लिए विभिन्न प्रयोग किए। इन प्रयोगों के माध्यम से छात्रों ने एक-दूसरे की सोच, व्यवहार और बौद्धिक क्षमता का आकलन किया। कार्यशाला में छात्रों ने अलग-अलग मनोवैज्ञानिक तरीकों का अभ्यास किया।
एक प्रयोग में एक विद्यार्थी को विषय बनाया गया। उसके साथियों ने उस पर विभिन्न मनोवैज्ञानिक विधियों का उपयोग कर अवलोकन दर्ज किए। इससे सामने वाले की मनोस्थिति का पता लगाने में सहायता मिलती है। छात्रों ने बताया कि वे अपनी कार्यशाला में रोजाना नए तरीकों से प्रयोग करते हैं। दो छात्राओं के एक समूह ने सेग्विन फॉर्म बोर्ड का उपयोग किया। उन्होंने इस बोर्ड से दस वर्ष से कम उम्र के बच्चों की बौद्धिक क्षमता का आकलन किया। छात्राओं ने बताया कि यह बोर्ड बच्चों की बौद्धिक क्षमता मापने में सहायक है।
एक अन्य समूह वयस्कों पर ''''रिवर्सिबल ऑपरेश'''' के तहत प्रयोग कर रहा था। इस समूह के विद्यार्थी काव्यांश ने बताया कि इसमें एक तस्वीर दिखाई जाती है। तस्वीर देखने के थोड़ी देर बाद वयस्क की सोच में आने वाले बदलावों का अध्ययन किया जाता है। काव्यांश ने बताया कि ऐसे प्रयोग अक्सर एसएसबी के साक्षात्कार में भी होते हैं। वहां भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
बोले विद्यार्थी
= मनोविज्ञान प्रयोगशाला में इंस्ट्रूमेंट से अधिक ऑब्जेक्ट जरूरी होते हैं। अपने साथी पर प्रयोग करने होते हैं, पांच-पांच के ग्रुप में बांट कर एक विद्यार्थी पर सभी बारी-बारी सभी प्रयोग करते हैं। - पूजा, छात्रा
= हमें प्रयोगशाला में तो अपना ऑब्जेक्ट अपने साथी को बनाना होता है, लेकिन अब प्रायोगिक परीक्षाएं होती हैं तो अपने साथ एक बाहरी ऑब्जेक्ट यानी वो इंसान भी लाना होता है जिस पर ये प्रयोग किया है। - सिंधु राघव, छात्रा