बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय में शनिवार को शिक्षा, संस्कृति और नवाचार पर वैश्विक दृष्टिकोण विषय पर एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय इंडो-ताइवान कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज व डायरेक्टरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस ने ताइपे इकोनॉमिक एंड कल्चरल सेंटर इन इंडिया (टीईसीसी) के तहत आयोजित की। इस दौरान विद्यार्थियों ने कॅरिअर व अवसरों के बारे में सवाल भी किए।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर मल्टीलिंगुअल स्टडीज की समन्वयक प्रो. अनीता त्यागी ने कहा कि यह कार्यशाला विद्यार्थियों को वैश्विक शिक्षा से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर है। नई दिल्ली स्थित ताइवान एजुकेशन सेंटर की निदेशक जिल लाई ने भारत-ताइवान के बीच शिक्षा और संस्कृति में सहयोग की अपार संभावनाओं के बारे में बताया। छात्रों को दी जाने वाली फेलोशिप की भी जानकारी दी।
डायरेक्टरेट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशंस के निदेशक प्रो. एसएस बेदी ने बताया कि ऐसी कार्यशालाएं विश्वविद्यालय की वैश्विक पहचान मजबूत करती हैं। मंदारिन प्रशिक्षिका चियाली चेन ने विद्यार्थियों को मंदारिन भाषा को संस्कृति से जोड़कर सीखने के लिए प्रेरित किया। टीईसीसी नई दिल्ली के सहायक निदेशक नीरज ने ताइवान की शिक्षा प्रणाली और उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी दी।