एशियाई खेलों में भाग लेने वाली तीसरी महिला खिलाड़ी
उनके करियर में कुछ वर्ष ऐसे भी आए जब उन्हें गंभीर चोटों (इंजरी) का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रियंका ने कभी हार नहीं मानी। अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर उन्होंने पहले टोक्यो और फिर पेरिस ओलंपिक के लिए सफलतापूर्वक क्वालिफाई किया। साधारण परिवार से ताल्लुक रखने वाली प्रियंका के परिवार में उनके माता-पिता और एक छोटा भाई है, जिनकी प्रेरणा और समर्थन हमेशा उनके साथ रहा है। इज्जतनगर मंडल से एशियाई खेलों में भाग लेने वाली वह तीसरी महिला खिलाड़ी हैं, जिससे पूरे शहर और रेलवे परिवार में गर्व का माहौल है।