बरेली। डेढ़ साल में सिर्फ 68 वाहन कंडम मानकर वाहन स्वामियों ने प्रमाणपत्र हासिल किया है। यह कंडम वाहनों की संख्या के 10 प्रतिशत भी नहीं है। स्क्रैप नीति को लागू होने के बाद से मुख्यालय और संभागीय कार्यालय आरबीसी (रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी) सेंटर को शुरू करने कवायद में लगी है, लेकिन निजी संस्था इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है।
अधिकारियों की माने तो मुख्यालय से इसके लिए निविदाएं भी निकाली गई थीं, लेकिन कोई भी निजी फर्म शर्ताें पर खरी नहीं उतरी। इसके अलावा निजी फर्माें ने भी रुचि नहीं दिखाई। अधिकारियों का कहना है कि आरबीसी सेंटर सिर्फ निजी फर्म को ही डेवलप करना है। मुरादाबाद में आरबीसी सेंटर होने के कारण वाहन स्वामी वहां जाने से कतरा रहे है, जिसकी वजह से कंडम वाहनों की संख्या डेढ़ साल में कम हैं। संवाद
सही आंकड़ा नहीं है आरटीओ के पास
आरटीओ कार्यालय में सही कंडम वाहनों का सही आंकड़ा नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक एनसीआर की तरह बरेली में 10 साल डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल के वाहनों से संबंधित कोई आदेश नहीं आए हैं। वहीं 9.58 लाख वाहनों की बात करें तो लगभग 15 से 20 प्रतिशत वाहन कंडम हालत में हैं, जिनका पंजीकरण तो है, लेकिन वाहनाें का प्रदूषण व फिटनेस प्रमाणपत्र नहीं है। अब वह कंडम हालत में है या नहीं, इसे बता पाना मुश्किल है। प्रमाणपत्र के आधार पर 10 से 15 प्रतिशत तक की छूट दी जाती है। मुरादाबाद में स्क्रैप नीति के तहत कंडम हालत में जमा होने वाले वाहनों की सिर्फ सूचना आती है, इसके अलावा कोई भी आंकड़ा उनके पास नहीं है।
वर्जन...
मुख्यालय स्तर पर आरबीसी सेंटर के लिए प्रस्ताव निकाले गए थे। निजी कंपनियां इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रही है, काेई कंपनी अगर सक्षम होगी तो उसे निश्चित तौर पर काम दिया जाएगा। अब संभागीय कार्यालय की ओर से इसके लिए जल्द दोबारा प्रयास शुरू किए जाएंगे, बरेली में सेंटर खुलने के बाद वाहनों की संख्या भी बढ़ेगी। - पंकज सिंह, आरटीओ प्रशासन