बरेली में बच्चे की मौत के बाद भी वेंटिलेटर पर उसके शव को रखकर बिल बढ़ाने का आरोप एक निजी अस्पताल पर लगा है। परिजन करीब आठ घंटे बाद अस्पताल से बच्चे की मौत की जानकारी मिलने पर आक्रोशित हो गए। उन्होंने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि, देर रात तक परिजन ने पुलिस को तहरीर नहीं दी।
बीडीए कॉलोनी के रहने वाले आदित्य सक्सेना के मुताबिक 10 जून को उनकी पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया था। जन्म के बाद संबंधित निजी नर्सिंग होम के चिकित्सक ने बच्चे की हालत गंभीर बताते हुए धर्मकांटा स्थित डॉ. अमित अग्रवाल के अस्पताल में इलाज के लिए रेफर किया था। बच्चे को सांस लेने में भी दिक्कत हो रही थी। आरोप है कि जब उन्होंने किसी भी अस्पताल में बच्चे को दिखाने की बात कही तो नर्सिंग होम के चिकित्सक ने डॉ. अमित को ही रेफर किए जाने के निर्णय को सही ठहराया।
आखिर में वह बच्चे को एंबुलेंस से लेकर अस्पताल पहुंचे। तीन दिन तक बच्चे की हालत ठीक रही। आदित्य का आरोप है कि रविवार रात 10 बजे वह बच्चे को देखकर लौट आए थे, लेकिन जब सोमवार सुबह अस्पताल पहुंचे तो उनसे वेंटिलेटर के दस हजार रुपये और नर्सरी के छह हजार रुपये जमा करने को कहा गया। वेंटिलेटर का जिक्र सुनकर वह स्तब्ध रह गए। चिकित्सक ने बताया कि रात ढाई बजे बच्चे की हालत बिगड़ गई थी, इसलिए उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा। सुबह करीब 11 बजे बच्चे की मौत की सूचना मिली।