इलाहाबाद में मशहूर सर्जन अश्वनी बंसल की हत्या के बाद पूरे प्रदेश के डॉक्टराें में गुस्से का ज्वार फूट रहा है। सोमवार को आईएमए से जुडे़ तमाम डॉक्टराें ने सुबह से शाम तक अपनी ओपीडी बंद रखी। जो मरीज आए उन्हें लौटा दिया गया। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं बाधित नहीं हुई। कुछ डॉक्टर ऐसे भी रहे जिन्होंने चोरी छिपे ओपीडी में मरीजाें का इलाज किया। शाम को मीटिंग के बाद डॉक्टराें ने कैंडल मार्च निकाला। मंगलवार को डॉक्टर ओपीडी खोलेंगे लेकिन काला फीता बांधकर काम करेंगे।
आईएमए की मांग है कि डॉ. बंसल के हत्यारों को 15 जनवरी तक पकड़ा जाए। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। इससे नाराज डॉॅक्टराें ने पूरे प्रदेश में काम ठप कर दिया है। सोमवार को सुबह 10 बजे से लेकर शाम को 5 बजे तक ओपीडी नहीं खोली। बड़े- बड़े अस्पतालाें में पर्चे नहीं बनाए गए। क्लीनिक और नर्सिंग होम भी बंद रहे। हालांकि कुछ डॉक्टर ऐसे रहे जिन्हाेंने हड़ताल में शामिल होते हुए भी ओपीडी में मरीज को देखा। फीस ली गई, हालांकि पर्चा नहीं बनाया गया। सिविल लाइंस, राजेंद्रनगर, संजयनगर के कुछ अस्पतालों में बिना किसी दबाव के मरीजाें का ओपीडी में इलाज किया जा रहा था। आईएमए के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. शरद अग्रवाल ने बताया कि शाम 4 बजे जनरल बॉडी मीटिंग में मंगलवार की रणनीति बताई गई। डॉक्टराें ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द हत्याराें को पकड़ा जाए और डॉक्टराें के सुरक्षा के इंतजाम भी हो।
- कैंडल मार्च निकाला, काला फीता बांधकर करेंगे काम
आईएमए बरेली के डॉक्टरों ने शाम 6 बजे के बाद कैंडल मार्च निकालकर अपना विरोध जताया। मार्च आईएमए भवन से चौकी चौराहे तक निकाला गया। इसमें डॉ. शरद अग्रवाल, डॉ. राजेश कक्कड़, डॉ. विनोद पागरानी, डॉ. सत्येंद्र सिंह, डॉ. प्रमेंद्र महेश्वरी, डॉ. अजय भारती, डॉ. अनूप आर्या, डॉ. रवीश अग्रवाल, डॉ. सुदीप सरन, डॉ. रवि खन्ना, अनिल रावत, कमल राठौर, ललित पागरानी, रतन अग्रवाल, अनित शर्मा, पुनित लुनियाल, लतिका अग्रवाल व अन्य शामिल रहे। मंगलवार को ओपीडी खोली जाएगी, लेकिन सभी डॉक्टर काला फीता बांधकर काम करेंगे।
- डॉक्टर दिन भर पोस्ट करते रहे अपनी फोटो
हड़ताल पर रहे डॉक्टराें ने अपनी फोटोज वाट्सएप ग्रुप पर अपलोड की। इस दौरान कुछ ने धूप सेंकते हुए तो कुछ ने आराम करते हुए फोटो डाली। इससे यह भी बताया गया कि उन्हाेंने सांकेतिक हड़ताल में अपना सहयोग दिया है। इसकी चर्चा हुई।
- जिला अस्पताल पर नहीं पड़ा कोई फर्क
जिला अस्पताल पर प्राइवेट डॉक्टराें के हड़ताल का कोई फर्क नहीं पड़ा। सोमवार को उम्मीद से अधिक मरीज आते हैं, आज भी आएं। लेकिन समझा जा रहा था कि निजी क्लीनिक बंद होने से यह संख्या बढ़ जाएगी जो नहीं बढ़ी। ओपीडी में 2000 से अधिक नए पंजीकरण हुए हैं, यह औसत हैं। पुराने मरीज भी इतने ही आए।