शनिवार रात में लगाया फंदा
शनिवार रात अमर ने कैंटीन से सटे स्टोर में गमछा से फंदा बनाकर फंदा लगा लिया। इसी दौरान कैंटीन में मौजूद बंदियों व कर्मचारियों ने उसे देखा तो चीखते हुए उधर की ओर दौड़े। उसे नीचे उतारकर जेल के डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देने का प्रयास किया पर हालत बिगड़ती देखकर जिला अस्पताल भेजा गया। रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।
अमर के शव का पोस्टमार्टम कराया गया तो उसमें हैंगिंग (लटकने) से मौत की पुष्टि हुई। हालांकि अमर के पिता दुर्गा प्रसाद ने आरोप लगाया कि जेल के कर्मचारियों ने साजिशन उनके बेटे की हत्या की है। उन्हें लगता है कि कैंटीन के किसी विवाद को लेकर हत्या की गई है। मामले में अफसरों से शिकायत करेंगे।
पिता के आरोपों के बारे में जब वरिष्ठ जेल अधीक्षक विपिन मिश्रा से बात की गई तो उनका कहना था कि जेल में अच्छे आचरण वाले बंदियों को ही कैंटीन जैसी जिम्मेदारी दी जाती है। अमर को वह भी व्यक्तिगत रूप से जानते थे। अमर ने जब फंदा लगाया तो वहां वार्डर अनिल त्रिवेदी की ड्यूटी थी। लापरवाही में उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की गई है।