अधिकांश स्कूलों में प्रबंधकों के चहेते या फिर रिश्तेदार प्रिंसिपल की कुर्सी संभाल रहे हैं। यही वजहहै कि इन स्कूलों में अभिभावकों को राहत देने के लिए एनसीईआरटी की किताबें लागू करने पर बात होती ही नहीं है। प्रिंसिपल भी उसी पब्लिशर के सिलेबस को अप्रूवल देते हैं, जिसे प्रबंधक चाहते हैं। स्कूलों में एनसीईआरटी की बुक्स लागू करने में यही सबसे बड़ी बाधा है। वहीं दूसरी ओर भवंस स्कूल में प्रिंसिपल अनुरोध चित्रा के इस्तीफे के बाद भी माहौल गरम है। स्कूल में बृहस्पतिवार को एक और महिला टीचर ने अपना इस्तीफा प्रबंधन को सौंप दिया। एक अन्य शिक्षिका ने शुक्रवार को इस्तीफा देने की बात कही है।
भवंस स्कूल में प्रिंसिपल अनुरोध चित्रा के इस्तीफा के बाद बृहस्पतिवार को प्रबंधन को अपना इस्तीफा सौंपने वाली टीचर रिचा का कहना है कि वह चार साल से स्कूल में पढ़ा रही थीं। प्रिंसिपल अनुरोध चित्रा ने एक बेहतर माहौल दिया था, जिसकी वजह से ही वह इतने समय स्कूल में रुक सकीं। वहीं एक अन्य टीचर तनु श्री ने शुक्रवार को इस्तीफा देने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर प्रबंधन की मनमानी से खफा होकर भवंस के प्रिंसिपल के इस्तीफा देने के बाद दूसरे स्कूलों में प्रबंधन और शिक्षकों के बीच टकराव की नौबत है।
अपनी लड़ाई खुद लड़ेंगे टीचर्स-प्रिंसिपल
अनुरोध चित्रा के समर्थन में दर्जन भर स्कूलों के प्रिंसिपल टीचर्स ने की बैठक
बृहस्पतिवार को दिल्ली पब्लिक स्कूल, पद्मावती एकेडमी, जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल, माधव राव सिंधिया, विद्या भवन, बेदी इंटरनेशनल, एसआर इंटरनेशनल समेत करीब दर्जन भर स्कूलों के प्रिंसिपल और कुछ शिक्षकों ने इकट्ठे होकर बैठक की। एनसीईआरटी की किताबें लागू करने की बात पर सभी ने तर्क दिया कि यह तो प्रिंसिपल और प्रबंधकों के हाथ में है। अधिकांश स्कूलों में प्रबंधकों के चहेते या उनके रिश्तेदार ही प्रिंसिपल हैं, जो हर बात में उनकी हां में हां मिलाते हैं। ऐसे में वे लोग आसानी से तो एनसीईआरटी की किताबें बिल्कुल लागू नहीं करने देंगे। बैठक में टीचर्स ने अपनी समस्याएं भी रखीं। एक टीचर ने कहा कि बीबीएल के अलावा किसी भी स्कूल में मातृत्व अवकाश नहीं मिलता। दूसरे ने बताया कि सिर्फ हार्टमैन स्कूल ने टीचर्स के लिए कैजुअल और मेडिकल लीव देने की व्यवस्था शुरू की है। जीके मांटेसरी स्कूल के शिक्षक को सत्र समाप्ति से ठीक पहले नौकरी से निकालने की बात भी सामने आई। पता लगा कि 80 प्रतिशत शिक्षकों पर अप्वाइंटमेंट लेटर नहीं हैं। ऐसी तमाम समस्याएं सामने आईं। हालांकि वे लोग पिछले छह महीने से व्हाट्सऐप के जरिए एक-दूसरे से जुड़े थे लेकिन अब एक संगठन बनाकर लड़ेंगे। इसके लिए जिला प्रशासन से भी मुलाकात करेंगे।
मोटी कमाई के चक्कर में एनसीईआरटी की किताबों से बच रहे स्कूल प्रबंधन
निजी स्कूलों के प्रबंधक और प्रधानाचार्य एनसीईआरटी की किताबें न लगाने के पीछे बाजार में उनकी उपलब्धता आसानी से न होने का तर्क देते हैं। मगर केंद्रीय विद्यालयों में एनसीआरटीई की ही किताबें पढ़ाई जाती हैं। केंद्रीय विद्यालय एनईआर की प्रिंसिपल और केंद्रीय विद्यालय की क्लस्टर हेड डॉ. अपर्णा ने बताया कि अब किसी ने भी किताबों की उपलब्धता में कोई दिक्कत नहीं बताई है। केंद्रीय विद्यालय जेआरसी के प्रिंसिपल सुरेश सिंह ने बताया कि एनसीईआरटी की किताबों में मुनाफा कम है जबकि निजी प्रकाशकों से प्रबंधकों को मोटा कमीशन मिलता है।
उपहार में पुरानी किताबें
केंद्रीय विद्यालय की क्लस्टर हेड डॉ. अपर्णा ने बताया कि केंद्रीय विद्यालय में कई सालों से एक अच्छी प्रक्रिया प्रचलित है। कोई भी बच्चा अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अपनी किताबें स्कूल को दे देता है जो उपहार स्वरूप दूसरे जरूरतमंद बच्चों को दे दी जाती हैं। इससे उनका खर्च बच जाता है और इससे मेलजोल की भावना भी पैदा होती है।