सराय में रिक्शे वालों के परिवारों में फांकाकशी की नौबत, मदद की गुहार
बरेली। कोरोना संक्रमण की काट को किया लंबा लॉकडाउन अमीरों को परिवार के साथ वक्त गुजारने का साधन बना है तो गरीबों के घर फांकाकशी की नौबत है। कोतवाली से सटे सराय मोहल्ले में रिक्शा चालकों के परिवार राशन व सुविधाओं के गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। इनमें सरताज भी शामिल है जिसे छह महीने पहले प्रधानमंत्री मोदी ने बरेली में आयुष्मान योजना का ब्रांड एंबेसडर बनाया है।
लॉकडाउन की वजह से कई बस्तियों में फांकाकशी की नौबत आ गई है। रिक्शेवालों और मजदूरों की बस्ती सराय मोहल्ले के कई परिवार भुखमरी से जूझ रहे हैं। अक्तूबर में यहां के रिक्शा चालक सरताज को पीएम मोदी ने दिल्ली बुलाकर सम्मानित किया और बरेली का आयुुष्मान एंबेसडर घोषित किया था। दरअसल रिक्शा चालक सरताज ने आयुष्मान कार्ड से अपना और दूसरे लोगों का इलाज कराने में मदद की थी। इसी आधार पर सरताज को इस खिताब के लिए चुना गया था।
अमर उजाला से बातचीत में सरताज ने बताया कि उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटे, दो बेटी और मां हैं। परिवार रोज जो कमाई करता था उससे शाम को चूल्हा जलता था। अब बेटे घर बैठे हैं। पत्नी और बेटियां पतंगें बनाकर गुजारा चला रही थीं। अब वह काम भी बंद है। घर में राशन का दाना भी नहीं मिला है। बस्ती में करीब डेढ़ हजार लोग रहते हैं। अधिकांश लोग या तो रिक्शा चलाते हैं या फिर मजदूरी करते हैं। इन दिनों सब हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं। बस्ती के अधिकांश परिवारों की रोजी रोटी के साधन बंद हैं। केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार के कार्यालय से कभीकभार इनके पास भोजन पहुंच जाता है। सरताज का कहना था कि डीएम व जनप्रतिनिधि अगर राशन भोजन की व्यवस्था करा दें तो भूखे मरने की नौबत नहीं आएगी।