भूकंप से निपटने को प्रशासन ने करीब सात करोड़ रुपये खाका तैयार कर लिया है। हालांकि बरेली को भूकंपरोधी मॉडल जिला बनाने के लिए यह रकम मामूली है, लेकिन पहले से यह भी तय नहीं किया जा सकता है कि भूकंप आने की स्थिति में जिले में कितना नुकसान हो सकता है। प्रोजक्ट में इसके बावजूद भी पांच करोड़ रुपये पुर्नवास के फंड को रखे गए हैं।
भूकंप के पहले क्या सावधानी बरती जानी चाहिए और भूकंप आने के बाद किस तरह की लोगों की मदद कैसे होगी?। इसका भी प्रोजक्ट में जिक्र किया गया है। पीड़ितों के पुर्नवास की व्यवस्था का भी खाका बनाया गया है। प्रोजक्ट में कुछ मामूली खामियां रह रही हैैैं, इन्हें पूरा करने के बाद प्रशासन इसे राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण को मंजूरी के लिए भेज देगा। प्राधिकरण से जिले को भूकंपरोधी मॉडल जिला बनाने की मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
इस तरह बना प्रोजक्ट
खतरे को न्यूनतम करना: भूकंप के खतरे से नुकसान किस तरह से कम किया जा सकता है, प्रोजक्ट में इसका जिक्र किया गया है। जिले के सभी घनी आबादी वाले इलाके में किस तरह खतरा न्यूनतम किया जाए। इस पर भी मंथन किए जाने की जरूरत बताई गई है। इसके लिए पुराने मकानों में क्या व्यवस्था हो, इस पर भी प्राधिकरण के जानकारों से राय मांगी गई है।
खतरे की तैयारी: भूकंप के खतरे से निपटने की जिलों में तैयारी क्या है। 120 गांव में प्रशासन जागरुकता अभियान चला चुका है। हर गांव और शहर की गली में पहुंचकर लोगों को भूकंप से निपटने के लिए जागरुक किया जाना है। जिला, तहसील और ब्लाक स्तर पर गोष्ठी आयोजित करके भूकंप से बचाव के तरीके बताए जाएंगे।
रिस्पांस: प्रशासन के पास भूकंप से निपटने के लिए कुछ इंतजाम तो हैं, लेकिन ऐसी स्थिति में रिस्पांस देखा जाता है। इसलिए भूकंप से निपटने को सिविल डिफेंस, समाजसेवी संस्थाओं के अलावा हर स्कूल के बच्चों को भी ट्रेड किया जाएगा। युवा टीम होने से रिस्पांस टाइम ठीक रहेगा, इससे लोगों को जल्द मदद मिलेगी।
पुर्नस्थापन: भूकंप आने के बाद जिन लोगों के घरों और प्रतिष्ठानों में जान माल का नुकसान हुआ है, उनके पुर्नस्थापन की क्या व्यवस्था है, इसके भी प्रोजक्ट में शामिल किया गया है। ऐसे स्थानों को भी चिहिन्त करके प्रोजक्ट में शामिल किया गया है, जहां फौरन पीड़ित परिवारों को शिफ्ट करके राहत दी जा सकती है। राहत के लिए साधन क्या हैं, इसका भी प्रोजक्ट में जिक्र है।
री-कंसट्रेशन: भूकंप से पीड़ित परिवार के घरों को देवीय आपदा कोष से आर्थिक मदद देकर उनके घरों और प्रतिष्ठानों का री-कंसट्रेक्शन कितने दिनों में हो सकता है। कितनी रकम में उनके मकान बनकर तैयार होंगे। उसके लिए स्थान कौन सा होगा, यह सब प्रोजक्ट में शामिल किया गया है।
बरेली में जनहानि हो चुकी है
-25 अप्रैल 2015 को भूकंप के झटके लगने पर आंवला में निर्माणधीन एक मकान का बीम गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी। जबकि बहेड़ी में एक महिला जख्मी हुई थी।
-बरेली स्मार्ट सिटी तो दूसरे चरण में भी नहीं बन पाया, लेकिन अब भूकंपरोधी मॉडल जिला बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्राधिकरण ने बरेली को चुना है। हमारा प्रयास यह है कि यहां इस पर काम हो। इसके लिए हम दिल्ली जाकर भी पैरवी करेंगे। लोगों को जागरुक करने के लिए हम पहले से ही प्रयास कर रहे हैं। प्राधिकरण को देने के लिए हमने सात करोड़ का प्रोजक्ट तैयार किया है। वहां से मंजूरी मिलते ही जिले में इस पर तेजी के काम शुरू होगा- मनोज, एडीएम(वित्त एवं राजस्व)