बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय (रुविवि) से संबद्ध नौ संघटक महाविद्यालयों में से पांच को असंबद्ध करने की तैयारी शुरू हो गई है। शाहजहांपुर व मुरादाबाद विश्वविद्यालयों में संचालित इन संघटक महाविद्यालयों को उन्हें सौंपने के प्रयास तेज कर दिए हैं। हाल ही में शाहजहांपुर के रजिस्ट्रार को पत्र भेजकर इनके वित्तीय व प्रशासनिक कार्यभार सौंपने की बात कही।
रुहेलखंड विश्वविद्यालय के अधीन इस समय नौ संघटक महाविद्यालय है। इनमें से तीन कॉलेज मुरादाबाद विश्वविद्यालय व दो शाहजहांपुर विश्वविद्यालय के परिक्षेत्र में आते हैं। अब तक औपचारिक रूप से इन कॉलेजों का हस्तांतरण दोनों विश्वविद्यालयों को नहीं हो सका है। अब रुविवि की ओर से दोनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिव को अपने परिक्षेत्रों में बने इन महाविद्यालयों की आर्थिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियां स्वयं वहन करने के लिए पत्र भेजा गया है।
ये कॉलेज होंगे विवि से अलग
मुरादाबाद मंडल में राजकीय संघटक महाविद्यालय मुरादाबाद, राजकीय संघटक महाविद्यालय अमरोहा व राजकीय संघटक महाविद्यालय बिजनौर हैं। शाहजहांपुर में राजकीय संघटक महाविद्यालय पुवायां व राजकीय संघटक महाविद्यालय कटरा है। राजकीय संघटक महाविद्यालय बहेड़ी, राजकीय संघटक महाविद्यालय नवाबगंज, राजकीय संघटक महाविद्यालय पूरनपुर, पीलीभीत व राजकीय संघटक महाविद्यालय दातागंज, बदायूं पहले की तरह विवि से जुड़े रहेंगे।
एक महाविद्यालय में औसतन 15 शिक्षक
इन सभी नौ संघटक महाविद्यालयों में औसतन 15 शिक्षक एडहॉक पर नियुक्त किए गए थे। प्रत्येक का औसतन वेतन करीब 35 हजार रुपये प्रतिमाह विश्वविद्यालय द्वारा वहन किया जाता है। सभी की बात करें तो करीब 50 लाख रुपये का बोझ विश्वविद्यालय पर प्रतिमाह पड़ता है। हालांकि, इन महाविद्यालयों से छात्र-छात्राओं की फीस भी रुविवि को ही मिलती है। इन महाविद्यालयों का इंफ्रास्ट्रक्चर शासन की ओर से बनाया गया था। फर्नीचर व स्टेशनरी आदि का खर्च रुविवि उठाता आ रहा है।
वर्जन :
रुविवि से अब तक संबंधित रहे नौ संघटक महाविद्यालयों में से शाहजहांपुर व मुरादाबाद विश्वविद्यालयों के परिक्षेत्र में आने वाले विश्वविद्यालयों का व्यवस्थापन रुहेलखंड विश्वविद्यालय नहीं कर सकता। इसलिए दोनों विश्वविद्यालयों के कुलसचिव को पत्र लिखवाया गया कि अपने परिक्षेत्र में आने वाले इन महाविद्यालयों के वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था स्वयं करें। रुविवि के परिक्षेत्र वाले संघटक महाविद्यालयों की स्थिति सुधारने के लिए प्रयास किए जाएंगे। - प्रो. अनिल कुमार राय, कुलपति, रुहेलखंड विश्वविद्यालय