बरेली। रुहेलखंडी गाय के वर्गीकरण का कार्य भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) के वैज्ञानिकों ने लगभग पूरा कर लिया है। अब इस नस्ल की गायों के पंजीकरण की तैयारी है। वहीं, पोनी और भेड़ के वर्गीकरण का कार्य शुरू हो गया है, ताकि इन नस्लों को नई पहचान मिल सके।
यह जानकारी बृहस्पतिवार को आईवीआरआई इज्जतनगर में नेशनल ब्यूरो ऑफ एनिमल जेनेटिक रिसोर्सेज (एनबीएजीआर) करनाल के साथ हुई बैठक के दौरान साझा की गई। निदेशक डाॅ. त्रिवेणी दत्त ने बताया कि नेटवर्क परियोजना के तहत रुहेलखंड क्षेत्र के पशुधन में गाय, भेड़, पोनी को लिया गया है। रुहेलखंडी गाय के पंजीकरण के सभी मानक पूरे हो चुके हैं। पशु संरक्षण के लिए जर्म प्लाज्म पर भी कार्य हो रहा है।
एनबीएजीआर करनाल के निदेशक डाॅ. बीपी मिश्रा ने कहा कि पशुधन पंजीकरण से प्रजातियों का संरक्षण होगा। किसानों की आय व पशुओं का मूल्य बढ़ेगा। अभी देश के 32 केंद्रों में पंजीकरण कार्य चल रहा है। 50 पशुओं की प्रजातियों की पहचान हुई है। उनका पंजीकरण किया जा रहा है। दो पशुओं की प्रजाति का पंजीकरण हो चुका है।
संयुक्त निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. रुपसी तिवारी ने बताया कि रुहेलखंडी गाय में कम लागत में ज्यादा उत्पादन और गुणवत्तापरक दूध देने की क्षमता है। प्रधान अन्वेषक डाॅ. अनुज चौहान ने परियोजना की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। बताया कि बरेली, बदायूं, पीलीभीत के 14 ब्लाॅकों के 159 गावों में 1,718 गायों का वर्गीकरण किया गया है। इसमें डाॅ. बृजेश कुमार, डाॅ. अमित कुमार और डाॅ. अयोन तरफदार शामिल हैं।