कमिश्नर प्रमांशु कुमार ने सोमवार को अपने पहले से तय कार्यक्रम के तहत कलक्ट्रेट का निरीक्षण किया लेकिन इसके बावजूद वह चकबंदी कार्यालय पहुंचे तो ज्यादातर स्टाफ नदारद मिला। कई विभागों में कमिश्नर ने बाबुओं से उनके पटल के बारे में पूछताछ की तो पता चला कि तमाम बाबुओं को अपने काम के बारे में ठीक जानकारी तक नहीं है। कमिश्नर ने दफ्तरों का माहौल सुधारने के लिए एक सप्ताह का वक्त दिया है।
चकबंदी कार्यालय का स्टाफ कमिश्नर के दफ्तर में पहुंचने के बाद पहुंचा। यहां रिकार्ड रूम में हर तरफ धूल जमी हुई थी जिसे वैक्यूम क्लीनर से साफ कराने को कहा गया। बस्ते ज्यादा होने के कारण उन्हें फार्म कक्ष में रखवाने के निर्देश दिए। जन सूचना अधिकारी पटल का लिपिक अपने काम की जानकारी नहीं दे पाया तो कमिश्नर ने शिकायतों को समय से निस्तारित करने के लिए भेजने को कहा।
शस्त्र अनुभाग के निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने विरासत के मामलों को जल्द निपटाने को कहा। डीएम ने बताया कि शासनादेश के तहत आवेदकों से शस्त्र चलाने का प्रमाण पत्र एसएसपी से लेने की व्यवस्था लागू कर दी गई है। शस्त्र चलाने का टेस्ट देकर प्रमाण पत्र लाने वाले आवेदकों के ही लाइसेंस जारी किए जा रहे हैं। कमिश्नर ने शिकायत प्रकोष में मुख्यमंत्री के संदर्भ, शासन , राजस्व परिषद व अन्य शिकायत संदर्भो के रजिस्टरों का जायजा लिया और पटल सहायक से पूछताछ की। इसके बाद डीएम कक्ष में अधिकारियों के साथ बैठक कर कलेक्ट्रेट के कार्यों की समीक्षा की। तहसील दिवस की शिकायतों के निस्तारण और तालाब और चकरोडों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। इस दौरान डीएम गौरव दयाल, एडीएम वित्त मनोज कुमार, एडीएम सिटी आलोक कुमार, एडीएम प्रशासन अरुण कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट उमेश कुमार मंगला, प्रशासनिक अधिकारी कुलदीप सिंह पन्नू आदि उपस्थित थे।