स्लग : वर्ष 2012 - 13 में चयनित समग्र ग्राम गोकिलपुर में मिली कुपोषण का कलंक न मिटने की वजह
बरेली (ब्यूरो)। वर्ष 2012 - 13 में क्यारा ब्लाक का ग्राम गोकिलपुर लोहिया समग्र ग्राम में चयनित हुआ। तब से अब तक तीन बार प्रमुख सचिव दौरा कर चुके हैं लेकिन यहां अब भी दो बच्चे अति कुपोषित हैं। मंगलवार सायं पांच बजे सरकारी अमला यहां फिर पहुंचा था। इनमें से एक डेढ़ वर्षीय ज्योति अपनी दादी की गोद में थी। उसका वजन कराया तो महज साढ़े किलोग्राम मिला जबकि 8.1 किग्रा से ज्यादा होना चाहिए। गांव की महिलाओं और पुरुषों से बातचीत में बड़ी बारीक वजह सामने आई। वह यह कि करीब 30 से 40 फीट ही गहरी बोरिंग वाले छोटे हैंडपंप से पानी पीना यहां लोग पसंद करते हैं, हालांकि इसमें प्रदूषण का खतरा ज्यादा होता है जबकि गांव में लगे 80 से 100 फीट गहरे सरकारी हैंडपंप का नहीं जिसका पानी अपेक्षाकृत स्वच्छ होता है।
पीने के पानी में जानबूझकर ऐसी जोखिम का जवाब खुद विशेष सचिव (उद्यान और खाद्य प्रसंस्करण) राजीव रौतेला नहीं पा सके लेकिन जिले में कुपोषण का कलंक न मिटने का जवाब मिल गया था। मौजूद जिला स्तरीय विभिन्न विभागीय अधिकारियों ने बताया कि कम गहरी बोरिंग वाले पंप में नाले -चबूतरे का पानी बहकर मिलने से प्रदूषण का खतरा ज्यादा रहता है। इससे पहले बिथरी ब्लाक में सीडीओ द्वारा गोद लिए मजरा भगनापुर और ग्राम भंडरिया में क्रमश: चार और 21 बच्चे कुपोषित मिले। भंडरिया में यह संख्या पहले से बढ़ी हुई मिली। डीएम द्वारा गोद लिए भुता ब्लाक के गांव गजनेरा और क्यारा ब्लाक के गांव खजुहाई में क्रमश: छह और 16 बच्चे अति कुपोषित मिले थे। वहां बातचीत में यह बारीक वजह सामने नहीं आई थी। इन पांचों में ही कुपोषण वाले हर मामले में बच्चा घर में ही जन्मा हुआ पाया गया लेकिन प्रसव और प्रसूता के लिए खतरनाक पाया गया लेकिन कुपोषण की वजह यह नहीं पुष्ट हुई थी।
घरे में अब भी दाई करा रही प्रसव, बेटा होने पर 500 लेती है
बरेली (ब्यूरो)। गांव भगनापुर में पोषण मिशन से जुड़ा एक जच्चा - बच्चा केयर संबंधी एक रोचक बात सामने आई तो विशेेष सचिव से लेकर मौजूद दूसरे अधिकारी भी भौंचक्क रहे। ब्लाक प्रमुख देवेंद्र सिंह और प्रधान गीता देवी के पति डा. एसपी सिंह ने बताया कि गांव में महिलाएं घरों में प्रसव को प्राथमिकता देती हैं और उसके लिए परमानेंट पर यहां दो दाई भी हैं। तत्काल बुलवाए जाने पर एक उम्रदराज दाई हाजिर भी हुई। उसने बताया कि अब लोग प्रसूता को अस्पताल नहीं ले जाते तो वही यहां सबकुछ कर - करा देती है। हां, बेटा हुआ तो 500 और बेटी हुई तो 400 मिल जाते हैं। दूसरी ओर गांव गोकिलपुर में आंगनबाड़ी वर्कर राजरानी ने बताया कि बीते जनवरी से अब तक आठ बच्चे पैदा हुए। इनमें से सिर्फ एक प्राइवेट अस्पताल में हुआ जबकि अन्य यहीं घर में।
कोटेदार साल में 10 माह का राशन देता है
बरेली (ब्यूरो)। पोषण मिशन कार्यक्रम के जमीनी निरीक्षण के क्रम में विशेष सचिव के साथ मौजूद सीडीओ ने राशन वितरण प्रणाली पर ग्रामीणों से सीधे फीडबैक लिया। भगनापुर में ग्रामीणों ने एक सुर में कहा कि साल में 10 माह का ही राशन किसी तरह मिल पाता है और दो माह का कोटादार ही जाने। तत्काल जिला पूर्ति अधिकारी के नाम सभी को पूरा राशन वितरित कराने का नोट लिखवा दिया गया। ग्राम गोकिलपुर में ग्रामीणों ने आवारा गायों का मुद्दा उठाया तो पहले इस नील गाय समझा गया। लेकिन वह आवारा गायें अनजान ग्रामीणों द्वारा छोड़ दी गईं बताई गईं। इस समस्या का कोई समाधान मौजूद अधिकारियों को नहीं सूझा।
मुआवजा तो दिलवाओ
बरेली (ब्यूरो)। विशेष सचिव के निरीक्षण के दौरान पांचों गांव में महिलाओं के साथ ही पुरुष भी बड़ी सख्या में थे। ये भी एक किनारे बैठकर अपनी बात कहने की बाट जोह रहे थे। अधिकारियों ने भी इनके मन की बात भांप ली थी। हर जगह सबसे अंत में इनसे ही मुलाकात कर समस्या पूछी। सभी जगह ग्रामीणों ने एक ही सवाल दागा कि फसलों के नुकसान का मुआवजा कब मिलेगा। ग्राम गोकिलपुर में लेखपाल को दलालों को मुआवजे की रकम दिलवा दिए जाने पर अधिकारियों ने हंसते हुए समझाया कि लेखपाल की नहीं बल्कि मुआवजा वितरण व्यवस्था की सच्चाई को जानो। पहले सर्वे 50 फीसदी से अधिक नुकसान का हुआ था और उन्हें ही मुआवजा बंटा है। बाद में 33 फीसदी तक वाले नुकसान के सर्वे का मुआवजा अभी सरकार से जारी नहीं हुआ है।
फाइलेरिया की शिकायत भी पहुंची
बरेली (ब्यूरो)। गांव भंडरिया में अधिकारी बैठे तभी एक युवक फाइलेरिया का सर्वे न होने और अपनी पत्नी जगेश्वरी देवी (35) के फाइलेरिया की शिकायत लेकर पहुंचा। सीएमओ डा. विजय यादव ने कहा मरीज बुलवाओ और यहां मौजूद बिथरी ब्लाक के एमओआईसी डा. आरएन सिंह दिखवाओ। ब्लाक चिकित्सालय पर रात भर भरती रखना होगा और वहीं सैंपल लेकर जांच को भेजा जाएगा। बाद में मरीज पहुंची तो डा. सिंह ने बुधवार को अस्पताल में बुलाया और प्रारंभिक संकेत फाइलेरिया वाला न होने का दावा किया।
दौरे से बच्ची हुई अचेत
बरेली (ब्यूरो)। गांव भंडरिया के मजरा भगनापुर के प्राथमिक विद्यालय में अधिकारियों के पहुंचने से पहले जुटी ग्रामीण महिलाओं और बच्चों की भीड़ में मौजूद एक बच्ची अचानक अकड़कर अचेत हो गई। उसे तुरंत परिसर में मौजूद हैंडपंप के पास लेकर पानी से सिर और चेहरा धोया गया। साथ ही जबरन मुंह खुलवाकर पानी पिलाया गया तो मूर्छा टूटी। बच्ची कक्षा दो मेें पढ़ती है। मौके पर मौजूद एमओआईसी डा. आरएन सिंह ने उसकी जांच करवाई और दवा दिलवाई। पूछताछ में पता चला कि बीच में उसकी दवाई छूट गई थी।
फल, मिठाई और नमकीन से जनता गदगद
बरेली (ब्यूरो)। सुबह 10 बजे से ही आठ गांवों में अधिकारियों के काफिले के पहुंचने की सूचना के आधार पर स्थानीय स्तर पर पंचायतीराज और अन्य विभागों ने अपनी तैयारी कर रखी थी। भगनापुर में तो काफिले के पहुंचने तक विद्यालय के बाहर के झाड़ - झंखाड़ साफ कराने का क्रम जारी था। हां, इस क्रम में दोपहर या शाम तक मौजूद रही जनता अधिकारियों द्वारा अपने लिए परोसे गए फल, मिठाई और नमकीन को उनमें बंटवा दिए जाने पर गदगद दिखी।
एएनएम का वेतन रोका, एमओआईसी को नोटिस
- पोषण मिशन निरीक्षण के दौरान लोहिया ग्राम गोकिलपुर में विशेष सचिव का चढ़ा पारा
- सीडीओ के गांव में बढ़ी कुपोषितों की संख्या, अधिकारियों को बच्चों से भावनात्मक तौर पर जुड़ने को कहा
बरेली (ब्यूरो)। पोषण मिशन कार्यक्रम की जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की हकीकत जानने को बरेली पहुंचे विशेष सचिव (उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण) राजीव रौतेला मंगलवार गांवों का दौरा करते हुए सायं पांच बजे समग्र ग्राम गोकिलपुर पहुंचे। प्रधान मधुबाला हैं लेकिन मौके पर प्रधानी संभाल रहे उनके बेटे महाराज सिंह यादव मिले। यहां ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति की एक भी बैठक न होने की जानकारी मिली। उन्होंने माना कि बैंक में केवाईसी न कराने से इस संबंधी संयुक्त खाता ही नहीं खुला है जिसमें स्वच्छता और पोषाहार के मद में सालाना 10 हजार रुपये आते हैं। इस समिति की सचिव एएनएम किरण सिन्हा सूचना देने पर भी अनुपस्थित मिलीं। क्यारा के प्रभारी चिकित्साधिकारी (एमओआईसी) डा. अशोक ने उसके दूसरे गांव में होने की जानकारी दी तो विशेष सचिव का पारा उखड़ा। उन्होंने कहा कि बहाना मत बनाइए डाक्टर साहब, बरेली में होगी पता कराइए, अभी पुष्ट कराऊंगा तो आपका निलंबन तय मानिए। जवाब में चुप्पी थी। आदेश हुआ कि एएनएम का वेतन रोका जाए।
साथ ही एमओआईसी को नोटिस दी कि तीन दिन में समिति की बैठक तय कराएं और बैंक खाता खुलवाएं। गांवों के निरीक्षण में मूल रूप से जो बात सामने आई वह यह कि ग्राम स्वास्थ्य पोषण दिवस (वीएचएनडी) न मनाए जाने और इसकी जानकारी आंगनबाड़ी वर्कर से लेकर आशा और एएनएम तक को नहीं है। इससे पहले सुबह विकास भवन में गांव गोद लेने वाले जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेते हुए उन्होंने इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाला बताया। फिर जिला पूर्ति अधिकारी, बीएसए, जिला पंचायतीराज अधिकारी और सीएमओ से इस कार्यक्रम में उनके विभाग के बुनियादी भूमिका के बारे में पूछा तो संतोषजनक जवाब न मिलने पर चुटकी ली। गांवों का निरीक्षण करने निकले तो सीडीओ द्वारा गोद लिए गांव भंडरिया में कुपोषित बच्चों की संख्या 17 से बढ़कर 21 हुई पाई। शाम को फिर विकास भवन में बैठक ली। इसमें उन्होंने चार प्रमुख निर्देश दिए। पहला कि गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चों के परिवारजन का मोबाइल नंबर लें एवं नियमित अंतराल पर हालचाल लेते रहें। डीपीआरओ को इन गांवों में सफाई कर्मी नियुक्त करने और आंगनबाड़ी केंद्रों की नियमित सफाई कराने को गहा। तीसरा कि गांवों में उपलब्ध पौष्टिक भोजन की जानकारी देें और चौथा कि बीएसए बेसिक स्कूलों में सफाई को बढ़ावा देने को साबुन - साबुनदानी खरीदें। बीएसए को बरामदे में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए कक्ष बनाने का निर्देश दिया।