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किसानों की नहीं सुनी, अपनी सुनाते रहे सीएम

Thu, 07 May 2015 01:39 AM IST
बरेली
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ढिंढोरा तो खूब पीटा गया था कि मुख्यमंत्री किसानों से मुखातिब होंगे। दर्द पूछेंगे और राहत के बारे में भी चर्चा होगी लेकिन पांच घंटे के इंतजार के बाद किसानों के हिस्से में सिर्फ अफसरों के आधे अधूरे जवाब ही आए। मुख्यमंत्री के संवाद के समय माइक आफ कर दिया था। बहेड़ी के एक किसान ने कुछ जानना चाहा तो वैज्ञानिक का जवाब आधे पर ही काट दिया गया।  
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सुबह दस बजे से ही एनआईसी में रबी फसल बर्बाद होने के बाद खरीफ की फसल में अधिक उत्पादन के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग हुई। कमिश्नर, डीएम, सीडीओ के साथ ही कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक समेत कई अफसर यहां पहुंचे। जिले के अलग-अलग हिस्सों से नौ किसान भी बुलाए गए थे। शुरू के ढाई घंटे कृषि वैज्ञानिकों ने खेती के मौजूदा हाल पर बात करते हुए नई तकनीक से खेती के संबंध में टिप्स दिये। करीब साढ़े बारह बजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव प्रोजेक्टर की स्क्रीन पर दिखे। इस दौरान वह सरकार की योजनाओं का ढिढोरा पीटते रहे और आधे घंटे बाद चले गए। इसके बाद वैज्ञानिकों ने किसानों से समस्याएं पूछीं। कुल 75 जिलों के किसानों को दो दो मिनट देना भारी पड़ रहा था। करीब दो बजे बरेली का नंबर आया। बहेड़ी के फिरोजपुर निवासी किसान सरदार नवाब सिंह ने बताया कि वे 1509 धान की वैरायटी बोते हैं। पिछली बार उनके धान में बीमारी लगी और सूख गया, इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। जवाब में वैज्ञानिक डॉ. वी एन सिंह ने कहा कि यह स्टिमबोर रोग के लक्षण हैं। वे टेल्ड दवा का दो बार स्प्रे करें। इससे पहले कि वैज्ञानिक अपनी बात पूरी करते, संवाद खत्म हो गया और दूसरे जिले के किसानों से वैज्ञानिकों की बात होने लगी। दोबारा लाइन मिलने के इंतजार में किसान तीन बजे तक बैठे रहे लेकिन नंबर नहीं आया। कमिश्नर, डीएम पहले ही निकल चुके थे, सीडीओ और कृषि अधिकारी किसानों के साथ बाहर आए।

निराश दिखे किसान
लंबी बैठक से निकले किसान निराश थे कि उनकी मुख्यमंत्री से बात नहीं हो सकी। हालांकि अफसरों के खास बुलावे पर आए यह लोग अपने दर्द को सार्वजनिक रूप से उजागर करने से बचे। मैकूलाल का कहना था कि अफसरों ने पहले ही तय कर लिया था कि कोई एक किसान ही सवाल करेगा। वे लोग अपने सवाल उसी को दे दें। तब सभी ने नवाब सिंह को अपनी समस्याएं बता दीं। नवाब सिंह के पहले ही सवाल का जवाब पूरा नहीं मिला तो बाकी का क्या मिलता। सुंदरलाल ने कहा कि मुख्यमंत्री से बात करने की इच्छा थी जो दिल में रह गई।
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वैज्ञानिकों की बात
किसानों के संवाद करने वाले पैनल में डॉ.सुधांशु, डॉ.तपेंद्र, डॉ.वीके मिश्रा, डॉ.वीएन सिंह और डॉ.महेश सिंह जैसे वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक शामिल थे। इन्होंने किसानों को पंक्ति में धान बुवाई, खेती की नई तकनीक, नए यंत्र और धान की नई प्रजातियों के बारे में बताया।
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