पानी में डिबोकर बिस्कुट खाता एक बच्चा।
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नवाबगंज। प्रवासी मजदूरों के लिए सभी इंतजाम करने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत दावों से बिल्कुल उलट है। रविवार को दिल्ली हरियाणा सहित अन्य राज्यों से आए 274 प्रवासी मजदूरों को परिवार सहित नवाबगंज के शेल्टर होम में ठहराया गया, लेकिन प्रशासन ने इनके खाने का इंतजाम नहीं किया। छोटे बच्ची भूख से बिलखने लगे तो माता-पिता ने रास्ते में खरीदा बिस्कुट का एक पैकेट उसे दे दिया। दूध का इंतजाम न होने पर बच्चे ने पानी में भिगाकर बिस्कुट खाकर पेट की आग शांत की। दोपहर 12 बजे के बाद स्वास्थ्य टीम वहां पहुंची और सभी की जांच की। पांच लोगों में कोरोना के लक्षण दिखने पर उनके सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए। शाम को भोजन के पैकेट देकर उन्हें बसों से घर तक छोड़ने का कार्य शुरू किया गया।
नमक से रोटी खा लेना, लेकिन कमाने बाहर मत जाना
लॉकडाउन ने श्रमिकों को ऐसा दर्द दिया कि अब उन्हें बाहर जाकर काम करने का इरादा तक त्याग दिया है। जनपद शाहजहांपुर की मीरा ने बताया कि आठ लोगों का परिवार है। हरियाणा से दिल्ली तक पैदल आए। वहां एक ट्रक वाले ने गाजियाबाद तक छोड़ दिया। जहां से प्रशासन ने बस में बिठाकर यहां छोड़ा। नम आंखों से मीरा ने कहा कि बहुत मुसीबत झेलकर यहां तक पहुंचे हैं। अब बच्चों को नसीहत देंगे कि भले नमक से रोटी खा लेना, लेकिन कभी बाहर मजदूरी करने मत जाना।