जो काम रात में कराए जा सकते हैं, उन्हें कराएंगे। दिन में श्रमिक और मशीनों की वर्किंग आसान होती है। इसलिए दिन के काम में कटौती नहीं की जा सकती है। इस हिसाब से कुतुबखाना के व्यापारियों और कोहाड़ापीर तक के 17 हजार उपभोक्ताओं को जून तक बिजली संकट झेलना पड़ेगा। आने वाली गर्मी में स्थिति और बिगड़ सकती है।
कपड़ा व्यापारी राजीव खुराना ने कहा कि बिजली के खंभे शिफ्ट होने थे। काम अधूरा छोड़कर अफसर और कर्मचारी दूसरे काम में लग गए। इसलिए बाजार में बिजली संकट है। बार-बार बिजली आती-जाती है। व्यापार प्रभावित हो रहा है।
गिफ्ट सेंटर के मालिक इंद्रजीत सिंह ने कहा कि धूल-मिट्टी उड़ने से सेहत को खतरा है। ग्राहक भी कम आते हैं। कार्यदायी संस्था को अपने काम के साथ छिड़काव कराना चाहिए, लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। हमें खुद छिड़काव करना पड़ता है।
बर्तन व्यापारी जगदीश शरण अग्रवाल ने कहा कि बिजली न आने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। त्योहार सिर पर है। दुकानदार धूल फांक रहे हैं। ग्राहक बहुत कम आ रहे हैं। पुल के निर्माण में देरी का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है।
कुतुखबाना पुल पर एक नजर
105 करोड़ रुपये लागत
20 करोड़ रुपये व्यय हुए
लाइन शिफ्टिंग के लिए तीस लाख रुपये का इंतजार
अस्थायी तौर पर लाइन शिफ्टिंग के लिए तीस लाख रुपये की जरूरत है। मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अभियंताओं ने सेतु निगम को एस्टीमेट भेजा है। इसके आधार पर सेतु निगम ने स्मार्ट सिटी परियोजना के अधिकारियों से बजट मांगा है। बजट मिलने पर काम शुरू हो जाएगा।
सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक वीके सेन ने बताया कि फाउंडेशन, सब स्ट्रक्चर और सुपर स्ट्रक्चर के लिए एक साथ काम चल रहे हैं। करीब 20 प्रतिशत तक काम हो गया है। काम की रफ्तार यही रही तो जून तक पुल का निर्माण पूरा हो जाएगा।
एसडीओ कुतुबखाना संजीव गुप्ता ने कहा कि पुल निर्माण स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत चल रहा है। तीन घंटे के शट डाउन में कभी-कभी काम पूरा नहीं हो पाता तो थोड़ा समय और लिया जाता है। कहीं कटौती ज्यादा हो रही है तो तत्काल अवगत कराएं। हो सकता है कि लोकल फाल्ट की वजह से ऐसा हो रहा हो, उसे ठीक कराएंगे।