बरेली। अपने ही विभाग के कर्मचारी की मौत के बाद उसके वारिस को फंड, ग्रेच्युटी आदि का भुगतान न करने पर विद्युत विभाग के मुख्य अभियंता वितरण, अधिशासी अभियंता वितरण और एक लिपिक को अदालत ने एक-एक माह की कैद की सजा सुनाई है। यह आदेश अपर सिविल जज विजय कुमार कटियार ने किया।
कैंट के गांव परगना निवासी रितु और उनके दो बेटों कुनाल व रोहित ने कोर्ट में दावा दायर किया गया। वादिनी रितु ने अपनी शिकायत में कहा कि उनके स्वर्गवासी ससुर विद्युत विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। उनकी मौत के बाद उनके फंड, ग्रेच्युटी, भविष्य निधि आदि के कुल 13 लाख 49 हजार 261 रुपये विभाग पर बकाया थे। यह धनराशि हासिल करने के लिए मृतक के बेटे एवं उनके पति ओम प्रकाश ने सिविल जज की कोर्ट में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र का मुकदमा दायर किया। कुछ समय बाद ही उनका देहांत हो गया। तब वादिनी ने एक दूसरा प्रमाण पत्र अपने नाम से जारी करने के लिए कोर्ट से कहा। कोर्ट ने उनको एक तिहाई राशि 4 लाख 49 हजार का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसको उन्होंने अधिशासी अभियंता के कार्यालय में जमा कर दिया लेकिन उन्हें भुगतान नहीं किया गया। वादिनी ने कहा कि 10 अक्तूबर 2018 से लगातार चक्कर काटने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं किया जा रहा है। कार्यालय में तैनात बाबू समीरउद्दीन ने भुगतान के एवज में उनसे रिश्वत मांगी। शिकायत में आरोप लगाया कि इस काम में मुख्य अभियंता और अधिशासी अभियंता समीरउद्दीन का बराबर का साथ दे रहे हैं। परेशान होकर उन्होंने अपने अधिवक्ता के जरिए इन सभीें को 22 फरवरी 2019 को नोटिस भेजा। इससे नाराज होकर इन लोगों ने कह दिया कि भुगतान तभी होगा, जब पैसा दिया जाएगा, मुकदमेबाजी कितनी भी कर लो।
कोर्ट ने वादिनी रितु का दावा स्वीकार करते हुए मुख्य अभियंता वितरण, अधिशासी अभियंता और लिपिक समीरउद्दीन को एक-एक माह के सिविल कारावास से दंडित किया। कोर्ट ने कहा अगर यह लोग कोर्ट के आदेश का पालन कर देते हैं और आवेदक संतुष्ट है तो यह आदेश निष्प्रभावी हो जाएगा।