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Bareilly News: इतिहास बन कर रह गए पोस्ट बॉक्स

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नवाबगंज। लंबे समय तक लोगों की बातचीत का साधन रहे पोस्ट बाॅक्स अब इतिहास बनकर रह गए हैं। अब इन पोस्ट बाॅक्स की आवश्यकता तभी पड़ती है, जब किसी सरकारी नौकरी के आवेदन सामान्य पोस्ट से मांगे जाते हैं। बाकी समय इन पोस्ट बाॅक्स की तरफ काेई मुड़कर भी नहीं देखता है। वहीं, अधिकांश पोस्ट ऑफिस बैंकिंग कार्य से जुड़ गए हैं। लोगों का पोस्ट ऑफिस सिर्फ बैंकिंग कार्यों के साथ स्पीड पोस्ट कराने का माध्यम बन कर रह गया है।
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दस साल पहले कस्बे में जगह-जगह पोस्ट बाॅक्स लगे नजर आते थे। कहीं बहुत बड़े व गली-मोहल्लों के बाहर छोटे-छोटे बाॅक्स लटके रहते थे। इनसे प्रतिदिन डाकिया डाक निकालकर ले जाता था। पिछले दस सालों में आई संचार क्रांति के बाद मोबाइल, इंटरनेट, मेसेज, फेसबुक और व्हाट्सएप आदि के बाद लोग पोस्ट ऑफिस व पोस्ट बाॅक्स भुला बैठे हैं। यदि ऐसे ही चलता रहा तो पोस्ट बाॅक्स तो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए इतिहास बनकर रह जाएंगे।



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योजनाओं, बैंकिंग और स्पीड पोस्ट का होता है अधिकांश कार्य



पहले संदेश भेजने या प्राप्त करने का मुख्य माध्यम चिट्ठी, पोस्टकार्ड,अंर्तदेशीय पत्र, स्पीडपोस्ट था, लेकिन जब से सोशल मीडिया का दौर आया है, तब से लोग पोस्ट ऑफिस और पोस्ट बाॅक्स की ओर देखते तक नहीं है। पोस्ट ऑफिसों में अब सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और स्पीड पोस्ट का अधिकांश कार्य होता है। आने वाली हमारी पीढ़ी इसको भूल जाएंगे।
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-शुभनेश कुमार, शाहपुर जी सुखराय




प्रतिदिन एक-दो पत्र मिल जाते हैं :

कस्बे व देहात में जगह जगह पोस्ट बाॅक्स रखे हैं। लोगों ने पोस्ट बाक्स में पत्र डालना ही बंद कर दिया है। डाकिया बाॅक्स को खोलते हैं। अभी भी प्रतिदिन एक-दो पत्र मिलते हैं। अधिकांश काम स्पीड पोस्ट का हो गया है। सरकारी विभागों में साधारण डाक और स्पीड पोस्ट से पत्र भेजे जाते हैं। साथ ही बैंकिंग का कार्य भी होता है। सोशल मीडिया से पोस्ट ऑफिस का कार्य कम हुआ है ।
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-जोगेन्द्र कुमार, कार्यवाहक पोस्टमास्टर, नवाबगंज
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