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गरीबों का चावल  बाजार में, नमूने भरे

Thu, 08 Jun 2017 12:58 AM IST
बरेली।  
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Poor rice In the market, samples filled - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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नई सरकार बनते ही सरकारी चावल और गेहूं बड़े पैमाने पर खुले बाजार और फ्लोर मिलों पर चोरी छिपे पहुंच रहा है। एक शिकायत मिलने पर खाद्य विभाग और एफएसडीए अफसरों ने गरीबों को वितरित होने वाले चावल की जांच करने के लिए पुराना शहर में तीन दुकानों पर छापे मारे और नमूने भरे। इन अफसरों ने थोक में चावल कालाबाजारी करने वाले का गोदाम चेक नहीं किया।
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प्रशासन को जानकारी मिली थी कि रिठौरा में एक चर्चित कारोबारी सरकारी चावल और गेहूं राज्य खाद्य निगम गोदामों से लेकर कालाबाजारी में बेचता है। बताया गया कि जोगी नवादा इलाके में दुकानों पर सरकारी चावल खुले आम बिक रहा है। इस पर आपूर्ति और एफएसडीए की एक संयुक्त छापामार टीम बनी। क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी किशोर कुमार और एफएसडीए अधिकारी अक्षय प्रधान आदि ने पुराना शहर जोगी नवादा स्थित अनवार, अली शेर और शकील की दुकानों पर बिक रहे चावल के नमूने भरे। अफसरों ने बताया कि देखने में चावल सरकारी गोदाम जैसा था, लेकिन इसकी लैब में इसकी जांच होगी।

हर माह हजारों क्विंटल गरीबों का राशन ब्लैक
प्रशासन को शिकायतकर्ताओं ने जानकारी दी है कि रिठौरा में तीन चार स्थानों पर राज्य खाद्य निगम गोदामों से लाया गया चावल और गेहूं स्टोर किया जाता है। कालाबाजारी करने वाले 50 किलो बोरा से 60 किलो में अन्य वारदाना में 60 किलो भरकर खुले बाजार में सप्लाई किया जाता है। कई प्रमुख फ्लोर मिल भी इसके ग्राहक हैं। इस धंधे में एसएफसी प्रबंधक आदि सीधे शामिल बताए जाते हैं, लेकिन बड़े अफसरों से सीधे साठगांठ होने से कोई कार्रवाई नहीं होती है। पिछले दिनों भुता और उड़ला जागीर आदि इलाकों में सरकारी राशन ब्लैक होते पकड़ा गया था। इसमें मामले को ठंडे बस्ते डाल दिया गया है।
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