इस माह से सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाला केरोसिन कोटा कम हो गया है। सप्लाई मात्रा कम होने पर अब कार्ड धारकों को एक से डेढ़ लीटर ही केरोसिन मिल पाएगा। नये कोटे के अनुरूप जिले में वितरण शुरू हो गया है। वीआईपी जिलों में कटौती नाममात्र के लिए की गई है। माना जा रहा है कि घरेलू रसोई गैस कनेक्शन की बढ़ती तादाद से केरोसिन खपत लगातार कम होती जा रही है। इसलिए सरकार ने धीरे-धीरे कोटा कम करना शुरू कर दिया है। इस बार प्रदेश में 36.53 प्रतिशत कोटा कम किया गया है। इससे सभी जिलों में पांच से 50 प्रतिशत तक कोटा कम हुआ है। खाद्य विभाग ने नया कोटा रोस्टर जारी कर दिया गया है। इसके तहत जिले में वितरण शुरू हो गया है।
वीआईपी जिलों पर ध्यान
खाद्य विभाग ने केरोसिन आवंटन में पक्षपात करते हुए वीआईपी जिलों का खास ध्यान रखा है। जिन जिलों में प्रमुख सपा नेता या मंत्री रहते हैं, उन जिलों में आवंटन कटौती पांच से बीस प्रतिशत तक रखी है। बरेली, बदायूं और शाहजहांपुर में लगभग 45 और खाद्य राज्य मंत्री के जिले पीलीभीत में सबसे कम 24 प्रतिशत तक कटौती हुई है। उधर, कैबिनेट खाद्य मंत्री जिला के जिले अमरोहा में पांच प्रतिशत तक ही कटौती हुई है। इसी तरह अन्य ऐसे वीआईपी जिलों में कटौती कम हुई है। वीआईपी जिलों में राशनकार्ड धारकों को कोई खास परेशानी नहीं होगी, लेकिन बरेली समेत अन्य सामान्य जिलों में लोगों को सिर्फ एक से डेढ़ लीटर तक प्रतिमाह केरोसिन मिल पाएगा।
कालाबाजारी दाम बढ़ेगा
ग्रामीण राशन दुकानों से केरोसिन का वितरण मनमाने तरीके से होता है, बताया जाता है कि ज्यादातर केरोसिन कालाबाजारी में चला जाता है। डीजल में केरोसिन मिलाने वाले कारोबारी इसके नियमित ग्राहक हैं। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों में स्थित पेट्रोल पंपों पर केरोसिन खपत ज्यादा होती है। कोटा कम होने से काला बाजारी में केरोसिन दाम में बढ़ेंगे।