बरेली। स्वास्थ्य विभाग का कहना है करीब तीन दिनों से आईवीआरआई लैब में रिपेयरिंग चल रही है लिहाजा वहां भेजे जा रहे सभी सैंपल की रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। कोविड वार्ड में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के मुताबिक रिपोर्ट आने में देरी क्वारंटीन लोग भी भड़क रहे हैं।
करीब डेढ़ महीने से कोरोना टेस्ट के लिए सैंपल आईवीआरआई भेजे जा रहे हैं। शुरुआत में आईवीआरआई के अधिकारिक बयान के मुताबिक लैब में करीब 50 सैंपल की रोज जांच की क्षमता थी। रिपोर्ट भी शाम छह से सात बजे तक स्वास्थ्य विभाग को भेज दी जा रही थी। करीब एक महीने तक यह सिलसिला ठीक चला लेकिन तीन दिन से दिक्कतें पैदा होने लगी हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक लैब में चल रही रिपेयरिंग की वजह से जो जांच रिपोर्ट आ रही हैं, वे भी देर रात तक मिल रही है। स्वास्थ्य विभाग ने इस कारण कम सैंपल भेजना शुरू कर दिया ताकि जितने सैंपल जाएं, उनकी रिपोर्ट मिल सके और ज्यादा सैंपल की जांच का बोझ भी लैब पर न पड़े।
तीन दिन से पीलीभीत-बदायूं के नमूनों की भी जांच
आईवीआरआई लैब में तीन दिनों से शासन के निर्देश पर पीलीभीत और बदायूं के सैंपल की भी जांच हो रही है। इसके बाद लैब में हर दिन सौ से ज्यादा सैंपल की जांच की जा रही है। आईवीआरआई अफसरों का दावा है कि बरेली समेत दो और जिलों के सैंपल की जांच करने में कोई दिक्कत नहीं है। जितने भी सैंपल जिस भी जिले से मिल रहे हैं सभी की जांच कर देर शाम तक रिपोर्ट भी दी जा रही है।
रिपोर्ट में देरी से क्वारंटीन लोगों में बढ़ रहा है मानसिक तनाव
सैंपल की जांच रिपोर्ट मिलने में देरी की वजह से संदिग्ध संक्रमित जो सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल समेत दूसरे अस्पतालों और इंस्टीटयूट में क्वारंटीन हैं, वे परेशान हो रहे हैं। सायकोलॉजिस्ट डॉ. हेमा खन्ना ने बताया कि किसी व्यक्ति का अगर सैंपल ले लिया जाए और रिपोर्ट मिलने में देरी हो तो ऐसी स्थिति में उसकी बेचैनी बढ़ सकती है। सकारात्मक सोच के बजाय नकारात्मकता हावी होने लगती है। कोरोना की भयावहता के चलते संभव है कि यह मानसिक तनाव हाइपरटेंशन के मरीज की तबियत भी खराब कर दे।
क्वारंटीन प्रवासियों की देखरेख का भी बढ़ रहा खर्च
दिल्ली, मुंबई, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों से वापस आए करीब 40 हजार से ज्यादा प्रवासियों को प्रशासन ने शहर की सीमा पर स्थित कॉलेज, स्कूल में इंस्टीट्यूशनल क्वारंटीन किया है। जिनके रहने और खाने का पूरा इंतजाम प्रशासन को करना होता है। शासनादेश के तहत इन लोगों का सैंपल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा जाएगा। रिपोर्ट निगेटिव आने पर होम क्वारंटीन किया जाएगा। अब सैंपल की जांच रिपोर्ट आने में देरी हो रही है तो इन लोगों के रहने और खाने का अतिरिक्त भार राजकोष पर पड़ रहा है। वहीं, रोज प्रवासियों के आने की वजह से क्वारंटीन सेंटर भी भरते जा रहे हैं।
बानखाना-सिरौली के संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की रिपोर्ट दो दिन बाद भी नहीं
बानखाना और रामनगर सिरौली के मुंबई से आए संक्रमित युवकों के परिवार वालों को क्वारंटीन कर उनके सैंपल आईवीआरआई भेजे गए थे लेकिन दो दिनों से उनकी रिपोर्ट न मिलने की बात स्वास्थ्य विभाग के अफसर कह रहे हैं। इसके अलावा दो दिन पहले मुंबई और जयपुर से वापस आए 24 प्रवासियों के छह पॉजिटिव पूल सैंपल में सभी का अलग-अलग सैंपल बुधवार को लिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के मुताबिक लैब में चल रहा काम पूरा होने की जानकारी मिलने के बाद ही सैंपल जांच को भेजे जाएंगे। इन मामलों में संक्रमण की पुष्टि के बाद उनके संपर्क में आने वालों और पूल के अलग-अलग सैंपल में कितने संक्रमित हैं, इसकी जानकारी न होने से शहरवासी असमंजस में हैं।
रिपोर्ट में कई दिनों की देरी से बदल सकता है नतीजा
एक मेडिकल कॉलेज का पूल सैंपल पॉजिटिव मिलने के बाद पूल में शामिल तीन डॉक्टर और तीन नर्स के चार दिन बाद लिए गए सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। बिहारमान नगला और भुता सिंघाई के भी दो पूल पॉजिटिव आए फिर सभी नौ लोगों की व्यक्तिगत जांच की रिपोर्ट निगेटिव आई। अब एक इंस्टीट्यूट में क्वारंटीन 24 प्रवासी के छह पूल सैंपल पॉजिटिव आए हैं। इनमें भी आशंका जताई जा रही है कि जब एक ही दिन में पॉजिटिव पूल के अलग-अलग सैंपल की रिपोर्ट निगेटिव हो सकती है तो प्रवासियों के पूल सैंपल में शामिल सभी के अलग सैंपल की रिपोर्ट भी निगेटिव हो सकती है।
आमने-सामनेःकम सैंपल एडमिट कर रही है लैब.. टुकड़ों में आ रही रिपोर्ट
आईवीआरआई प्रशासन की ओर से लगातार जो जानकारी मिल रही है, उसके मुताबिक वहां लैब में रिपेयरिंग का काम चल रहा है जिसकी वजह से कई दिनों से लैब में कम सैंपल एडमिट किए जा रहे हैं। इसी के मद्देनजर फैसला लिया गया है कि अगर आईवीआरआई लैब सैंपल एडमिट करने की स्थिति में होगी तभी नए सैंपल जांच के लिए आईवीआरआई भेजे जाएंगे। अब तक जो सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, उनकी रिपोर्ट वहां से एक साथ आने के बजाय, टुकड़ों में आ रही है। - डॉ. रंजन गौतम, एसीएमओ, जिला सर्विलांस अधिकारी
न मशीन खराब न रिपेयरिंग.. स्वास्थ्य विभाग बताए कब कम दीं रिपोर्ट
पीलीभीत और बदायूं के सैंपल की भी जांच का काम हमारे पास बढ़ गया है। न हमारी मशीन खराब है और न रिपेयरिंग जैसा कोई काम चल रहा है। जितने भी सैंपल मिल रहे हैं, उन सभी की जांच की जा रही है। सैंपल की जांच रिपोर्ट लैब की रिपेयरिंग की वजह से नहीं मिल पा रही हैं, यह बात वे किस आधार पर कह रहे हैं। हम तो रोजाना रिपोर्ट दे रहे हैं। सैंपल मिलते ही जांच की प्रक्रिया शुरू कर देेते हैं और रिपोर्ट भी समय पर दे रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग हमें बताए कि कब हमने उन्हें रिपोर्ट कम दी। - डॉ. आरके सिंह, निदेशक आईवीआरआई