बरेली। यातायात माह की शुरुआत हो चुकी है। परिवहन विभाग, ट्रैफिक पुलिस व जिला प्रशासन संयुक्त रूप से नो हेलमेट-नो फ्यूल अभियान भी चला रहे हैं। दूसरी ओर, सड़क किनारे बिक रहे 200-250 रुपये के हेलमेट इसको पलीता लगा रहे हैं।
इनकी निगरानी कोई नहीं करता। पुलिस, प्रशासन और परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई नहीं होने की वजह से परिवहन विभाग के कार्यालय और पुलिस लाइन के बगल में ही ऐसी दुकानें संचालित हो रही हैं। इसके लिए हमें खुद ही जागरूक होना होगा। ये घटिया हेलमेट आपको चालान से तो बचा लेंगे, पर हादसा हुआ तो ये जान नहीं बचा पाएंगे। सड़क किनारे लगने वाली दुकानों पर 100 रुपये से हेलमेट की रेंज शुरू होती है। फेसलेस हेलमेट की कीमत 300 रुपये तक है। पुराने मॉडल के हेलमेट 100 से 150 रुपये तक बिक रहे हैं। पुराने मॉडल में अगर आईएसआई मार्क का हेलमेट लेना है तो उसके लिए 200 से 250 रुपये तक देने होंगे। दूसरी ओर, भारतीय मानक ब्यूरो से प्रमाणित हेलमेट की शुरुआत एक हजार रुपये से हो रही है। मार्केट में इस समय आठ हजार रुपये तक के हेलमेट उपलब्ध हैं।
हेलमेट विक्रेता ज्ञान सागर के मुताबिक, नामी कंपनियों के हेलमेट कुछ ही लोग खरीद रहे हैं। सड़कों के किनारे लगने वाली दुकानों के हेलमेट मजबूत नहीं होते, जबकि प्रमाणित कंपनी के हेलमेट हादसे की स्थिति में काफी कारगर साबित होते हैं।
शाहाबाद। डेहा कॉलोनी में नगरकीर्तन निकलने के लिए बनाई गई अस्थाई सड़क। विज्ञप्ति