बरेली। नगर निगम के रिकॉर्ड में शहर के अलग-अलग वार्डों में सौ तालाब दर्ज हैं। मौके पर इनमें से कई का अस्तित्व मिट चुका है। संपत्ति विभाग की ओर से कराए जा रहे सर्वे में यह हकीकत सामने आई है। 20 से अधिक तालाबों की जमीन पर आलीशान इमारतें खड़ी हैं। कुछ जगह तो पूरी कॉलोनी ही बसा दी गई है। तालाब की जमीन पर पक्के निर्माण कर कब्जे का सिलसिला अब भी जारी है।
संपत्ति विभाग के सर्वे के दौरान डेलापीर, सीबीगंज, किला, फरीदापुर चौधरी, परवाना नगर समेत अन्य इलाकों में कई तालाब ऐसे मिले, जिनकी जमीन पर एक-दो नहीं, बल्कि 20 से अधिक मकान बन चुके हैं। कुछ जगहों पर लोगों ने तालाब की जमीन को टुकड़ों में बांटकर कब्जा कर लिया है। धीरे-धीरे वहां पक्के मकान खड़े कर दिए।
निगम की निगरानी व्यवस्था पर सवाल
तालाबों की जमीन पर बड़े पैमाने पर मकान और कॉलोनियां विकसित होने का मामला निगम की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रहा है। तालाबों की जमीन पर निर्माण कैसे होता रहा, इसकी भी जांच जरूरी है। निगम अब ऐसे कब्जों की सूची तैयार कर उन पर कार्रवाई की योजना बना रहा है।
तालाब की जमीन पर हो रहा था निर्माण, टीम ने रुकवाया
निगम की टीम बीते सोमवार को सीबीगंज के नंदौसी स्थित पचा गौटिया में निरीक्षण करने पहुंची तो वहां तालाब की करीब दो बीघा जमीन पर दो मकान और अन्य स्थानों पर बाउंड्रीवाल का निर्माण होता मिला। टीम ने काम रुकवा दिया है।
हरूनगला में कब्जेदारों को नोटिस जारी करने की तैयारी
एक माह पूर्व टीम हरूनगला पहुंची थी। काफी मशक्कत के बाद पता चला कि जिस स्थान पर टीम खड़ी है, वहां कभी तालाब था। अब वहां 20 से अधिक मकान बन गए हैं। निगम अब कब्जेदारों को नोटिस जारी करने की तैयारी में है।
वर्जन
तालाबों को कब्जामुक्त कराने के लिए टीमों को सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन वार्डों में सर्वे के दौरान कब्जा मिला है, वहां अवैध कब्जेदारों को नोटिस जारी किए जाएंगे। अभियान निरंतर जारी रहेगा। - संजीव कुमार मौर्य, नगर आयुक्त