शतरंज में एक गलत चाल चली नहीं कि शह और फिर मात। वीरपाल विरोधी गुट में शुमार किए जाने वाले और मुख्यमंत्री से नामित जिला उपाध्यक्ष अरविंद यादव की जुबान क्या फिसली उनकी बरेली सपा की सियासी शतरंज में मात हो गई। शनिवार को सपा की बैठक में हंगामे की घटना के बाद शाम को प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव के पूर्व में भेजे गए शिकायती पत्र का संज्ञान लेते हुए अरविंद यादव को तत्काल प्रभाव से जिला उपाध्यक्ष पद से हटा दिया है। वीरपाल ने अपने पत्र में यह भी लिखा था कि आरोप साबित नहीं होते हैं तो मेरे खिलाफ कार्यवाही करें, नहीं तो अरविंद को पार्टी से निकाल दें।
अनुशासनहीनता के मामले में अरविंद के खिलाफ हाईकमान को शिकायत भेजने और उन्हें उपाध्यक्ष पद से हटाए जाने की जानकारी जिला महासचिव प्रमोद बिष्ट, महानगर अध्यक्ष जफर बेग और कोषाध्यक्ष संजीव यादव ने दी। मिशन कंपाउंड स्थित सपा जिला कार्यालय में हुई प्रेस कांफ्रेंस में जिलाध्यक्ष वीरपाल मौजूद नहीं थे। वह बाद में पत्रकारों से औपचारिक रूप से मिले और हाईकमान को भेजी गई शिकायतों के आधार पर अरविंद को हटाए जाने की जानकारी दी।
उधर, सियासी हल्कों में यह घटनाक्रम विधायक अताउर रहमान को शह देना भी माना जा रहा है। उपाध्यक्ष बनने के बाद अरविंद के स्वागत होर्डिंग्स में वीरपाल शामिल नहीं थे लेकिन अताउर रहमान को जगह दी गई थी। रात्रि चौपाल का कार्यक्रम शुरू करने को लेकर जिलाध्यक्ष ने इसकी जानकारी होने से इंकार कर दिया था। हालांकि यह कहा था कि जो भी यह कर रहा है पार्टी का काम कर रहा है। इन रात्रि चौपालों के साथ 23 जनवरी को लगाई गई रात्रि चौपाल में भी अताउर रहमान के साथ अरविंद यादव थे जबकि वीरपाल नहीं। उधर, शनिवार को हुई मासिक बैठक में अरविंद के वीरपाल से स्पष्टीकरण मांगने के मामले में विधायक अताउर रहमान की पहल पर ही बंद कमरे में वीरपाल और अरविंद की वार्ता हुई थी। विधायक को अंदाजा हो गया था कि फिसली जुबान से बात बिगड़ सकती है। हालांकि उन्होंने इसे संभालने की कोशिश की लेकिन बात आगे बढ़ गई और रविवार को लखनऊ से अरविंद को पद से हटाने का फैक्स आ गया।
वीरपाल ने लगाए आरोप
राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को भेजे गए पत्र में वीरपाल ने तीन शिकायतें की हैं।
1. थाना फतेहगंज पूर्वी के नगरिया कला के अपराधी तौफीक पंखिया को पुलिस से बचाने के लिए 50 हजार रुपये की रिश्वत ली। एसओ रामवीर यादव जब उसे पकड़कर थाने लाए तो उसने पुलिस से कहा कि अरविंद यादव को 50 हजार रुपये दिए हैं। एसओ ने अरविंद से फोन पर पूछा तो उन्होंने इसे स्वीकारा।
2. बिथरी चैनपुर बसपा विधायक को पार्टी की जानकारी लीक करना, चार जिला पंचायत सदस्यों को उनके पक्ष में खड़ा करने के लिए पीलीभीत के चूकाबीच पर ले जाकर मिलवाना।
3. रिश्वतखोरी और पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा देना।
‘नेतृत्व के निर्णय का स्वागत है। मैं पार्टी का सिपाही हूं। आगे भी सिपाही बनकर काम करता रहूंगा। सारे आरोप मनगढ़ंत हैं।’
अरविंद यादव
पूर्व जिला उपाध्यक्ष
‘सपा अपनी अंदरूनी लड़ाई बसपा से जोड़कर इधर-उधर न फैलाए। बसपा, कांग्रेस, भाजपा और सपा से जुड़े सभी जिला पंचायत सदस्य हमारे अच्छे कामों का समर्थन करते हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष को कोई खतरा नहीं है।’
वीरेंद्र सिंह, विधायक बिथरी
हाईकमान का जो भी निर्णय है वह सबको मानना चाहिए। अरविंद यादव पर लगाए गए आरोपों का जवाब वही लोग देंगे, जिन्होंने आरोप लगाए गए हैं।
अताउर रहमान
विधायक, बहेड़ी