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बाहरी खुराफातियों की तो थी दंगे की पूरी तैयारी

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धरने में तौकीर के साथ दरगाह के लोगों के भी आने की खबर फैलाकर इकट्ठी की गई थी भीड़
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आजाद कॉलेज में जुटे युवाओं की जेबों में रखवाए गए थे पत्थर
बरेली। आजाद इंटर कॉलेज के मैदान पर धरना शुरू कराने वालों के मंसूबे क्या थे, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तमाम युवाओं की जेबों में उन्होंने पत्थर भी रखवा दिए थे। लोगों को गुमराह किया गया कि आईएमसी प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां इस्लामिया ग्राउंड पर धरना खत्म करने के बाद अब आजाद कॉलेज के धरने में शिरकत करेंगे और उनके साथ दरगाह आला हजरत के लोग भी पहुंचेंगे। इसके बाद भीड़ तो इकट्ठी हो गई लेकिन फिर भी बाहर से आए खुराफाती अपनी पहचान जाहिर करने से बचते रहे। गिरफ्तारी के बाद जब यह खुलासा हुआ कि धरना बाहरी लोगों ने शुरू कराया था तो इस धरने में शामिल हुए शहर के लोग भी सकते में आ गए।
संभल, प्रतापगढ़, अमरोहा, मुजफ्फरनगर और जम्मू के युवाओं की मदद से आजाद कॉलेज पर धरना शुरू कराने वाला किच्छा (उत्तराखंड) के गांव बरी का रहने वाला रिजवान कई दिनों से बरेली में मौजूद था। इस्लामिया ग्राउंड पर मौलाना तौकीर के धरना खत्म करने के बाद उन्हें भला-बुरा कहते हुए रिजवान ही 20-25 युवकों को लेकर आजाद कॉलेज पहुंच गया था और वहां आनन-फानन में सैकड़ों लोगों को इकट्ठा कर नया धरना शुरू करा दिया। पुलिस के कहने पर जब दरगाह परिवार के कुछ लोग यहां भीड़ को समझाने पहुंचे तो रिजवान ने उनसे माइक तक छीन लिया। खानकाह तहसीनिया के सूफी रिजवान रजा खां के साथ दूसरे मुअज्जिज लोगों के समझाने पर भी ये लोग नहीं हटे। इस घटना के बाद माजरा समझ में आया तो रात तीन बजे पुलिस ने आजाद कॉलेज में मौजूद लोगों को गिरफ्तार कर लिया। तमाम लोग भाग निकले लेकिन 34 को पकड़कर पुलिस थाने ले गई।
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गिरफ्तार किए गए लोगों में कई पुराना शहर के युवक थे जिन्होंने पुलिस को बताया कि उन्हें गुमराह करके धरने में लाया गया था। यह भी पता चला कि कुछ लड़कों की जेबों में पत्थर तक रखवाए गए थे। लंबी पूछताछ के बाद दरगाह के लोगों की सिफारिश पर स्थानीय युवाओं को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया लेकिन दूसरे शहरों के नौ खुराफातियों का शांति भंग करने के आरोप में चालान कर दिया। इनमें कुंडा (प्रतापगढ़) का फहीम, संभल के असमोली का नसीम रजा, मुजफ्फरनगर के सरैया का नजरे आलम, जम्मू के सोसगेट का मुजफ्फर हुसैन, अमरोहा के डिडौली का कासिम रजा और पीलीभीत के अमरिया के सैफुल मलिक के अलावा उनकी अगुवाई करने वाला पुलभट्टा (उत्तराखंड) के गांव बरी का रिजवान भी शामिल था। इनमें आठ लोगों को जमानत दे दी गई लेकिन रिजवान को जेल भेज दिया गया।

संदिग्धों के मोबाइल कब्जे में, डाटा चेक करेगी पुलिस
पुलिस को शक है कि आजाद इंटर कॉलेज के मैदान पर धरना शुरू कराने वाला पुलभट्टा के रिजवान समेत बाहर के दूसरे युवकों के तार राष्ट्रविरोधी तत्वों से जुड़े हो सकते हैं जिनकी मंशा आला हजरत की सरजमीं पर माहौल खराब कर देश भर में मुसलमानों को भड़काने का प्रोपेगंडा करने की मंशा हो सकती है। पुलिस ने बताया कि बुधवार की रात आजाद कॉलेज से पकड़े गए कई लोगों को संदिग्ध पाया गया है। इन सबके मोबाइल कब्जे में लेकर उनका डाटा चेक किया जा रहा है।
भीड़ को गुमराह करते रहे लेकिन अपना नाम तक नहीं बताया
तौकीर और दरगाह के लोगों का नाम लेकर इकट्ठी की भीड़
बरेली। आजाद कॉलेज में पहले मौलाना तौकीर और दरगाह के लोगों का नाम लेकर भीड़ इकट्ठी की गई और फिर दरगाह के लोगों के कहने के बावजूद धरना खत्म करने से इनकार कर दिया गया। इससे पहले नाटकीय ढंग से धरने की शुरुआत हुई। संदेह पैदा करने की सबसे बड़ी वजह यह थी कि इस भीड़ का नेतृत्व करने वालों में कोई स्थानीय चेहरा नहीं था। कमान संभालने वाले बाहरी लोग मौके पर पुलिस अधिकारियों के पहुंचने के बाद उनसे बात करने से कतराने लगे। कुछ लोगों ने उनके बारे में पूछताछ भी की लेकिन कोई नहीं बता सका कि ये लोग कौन हैं। ये लोग अपना नाम बताने से तक बचते रहे। इस बीच इन लोगों ने यह अफवाह भी फैलाई कि इस्लामिया ग्राउंड में धरना खत्म हो गया है, अब मौलाना तौकीर यहां पहुंच रहे हैं। फिर दरगाह के लोगों के भी आने की बात कही। इस पर भीड़ बढ़ने लगी। दरगाह के लोगों की अपील और आईएमसी की ओर से यह साफ किए जाने का बाद कि इस धरने से उनका लेनादेना नहीं है, भीड़ देर रात काफी कम हो गई। इसके बाद तीन बजे पुलिस ने बाकी लोगों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस को शक, पर्दे के पीछे कोई और तो नहीं
आजाद कॉलेज में भीड़ की अगुवाई कर रहे पुलभट्टा के रिजवान से अधिकारियों ने कड़ी पूछताछ की। पता चला कि एमबीए पास रिजवान ने मजहबी तालीम भी ली है, उसके परिवार के पास अच्छी खेतीबाड़ी है। इस्लामिया ग्राउंड पर मौलाना तौकीर का धरना शुरू होने के पहले ही दिन वह कई और लोगों के साथ बरेली पहुंच गया था और तबसे बरेली में ही था। एएसपी अभिषेक वर्मा ने बताया कि रिजवान के बरेली में लिंक तलाशे जा रहे हैं। उसके मोबाइल की लोकेशन और डिटेल भी निकलवाई जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि यहां कोई और व्यक्ति तो इन लोगों को गाइड नहीं कर रहा था। पुलिस का मानना है कि पर्दे के पीछे इस खेल में कुछ और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
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शहर इमाम को हिदायत- बाहरी लोगों से होशियार रहें
दरगाह के लोगों और शहर इमाम की सिफारिश पर की गई मामूली कार्रवाई
आजाद कॉलेज से पकड़े गए लोगों पर पुलिस रिपोर्ट दर्ज करना चाहती थी। कॉलेज प्रबंधन ने भी तहरीर दे दी थी लेकिन जब दरगाह से जुड़े लोगों के साथ शहर इमाम खुर्शीद आलम की पैरवी के बाद पुलिस ने शांति भंग करने के आरोप में मामूली कार्रवाई कर मामला निपटा दिया। हालांकि एएसपी ने शहर इमाम को बाहरी लोगों से होशियार रहने की हिदायत देते हुए कहा कि ऐसे लोग उन्हें भी फंसवा सकते हैं। खुर्शीद आलम ने कहा कि अपने शहर में अमन रखने की उनकी जिम्मेदारी है। समाजसेवी गुलफाम अंसारी ने कहा कि अगर ऐसी गलती दोबारा हुई तो वे पुलिस को सख्त कार्रवाई से रोकेंगे नहीं।
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