शहर दौड़ता रहा मगर लोग पूछते रहे.. सब ठीक है
- फोटो : अमर उजाला, बरेली
तनाव और आशंकाओं के बावजूद गैरमुस्लिम इलाकों में रोज की तरह दिखाई दीं गतिविधियां
दिन भर उड़ती रहीं अफवाहें, लोग फोन पर एक-दूसरे से तस्दीक करते रहे
बरेली। देश भर के तमाम शहरों से हिंसा की खबरों के बावजूद बरेली ने एक बार फिर साबित किया कि अमनपसंद शहर होने की अपनी पहचान पर कोई आंच आने देना उसे गवारा नहीं। जुमे की नमाज के बाद नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के एलान ने शहर को कुछ आशंकित जरूर किया लेकिन फिर भी उसकी रफ्तार पर कोई असर नहीं पड़ा। मुस्लिम बहुल इलाकों को छोड़ दिया जाए तो बाकी इलाकों की हलचल आम दिनों की तरह थी। अफवाहों के बावजूद दुकानें खुलीं और लोग भी घरों से निकले लेकिन चेहरों पर चौकन्नेपन के भाव लिए हुए। दिन भर फोन पर एक-दूसरे के इलाकों के हालचाल लेने का सिलसिला भी चलता रहा।
हर चौराहे और सड़क पर पुलिस और रिजर्व पुलिस की मौजूदगी ने भी लोगों को काफी हद तक आश्वस्त रखा। आबादी वाले इलाकों में अफसरों का भी मूवमेंट बना रहा। सर्दी की वजह से स्कूल पहले से बंद थे, इस वजह से भी लोग निश्चिंत रहे। कुछ इलाकों को छोड़कर ज्यादातर इलाकों में रोज की तरह भीड़भाड़ थी। सड़कों पर रोज की तरह आटो और टेंपों की भीड़भाड़ जरूर काफी कम थी लेकिन इसकी वजह से लोगों ने और ज्यादा सुकून महसूस किया। कुछ जगह पुलिस के दबाव का भी चहलपहल पर असर पड़ा। हालांकि फिर भी राजेंद्रनगर, डीडीपुरम, कैंट, पीलीभीत रोड, किला रोड और बदायूं रोड पर आबादी वाले इलाकों में कोई खास असर नहीं दिखा। इस बीच अफवाहों की वजह से लोगों में आशंकाएं जरूर बनी रहीं।
इंटरनेट बंद होने से लोगों को शहर के बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही थी। दोपहर के वक्त नमाजियों की भीड़ निकली तो सड़कों पर गहमागहमी देख अफवाहों का बाजार भी गरम हो गया। पूरे दिन लोग अपने परिचितों को कॉल करके शहर का हाल जानते रहे। थानों, पुलिस अफसरों से लेकर अखबारों के दफ्तरों तक में इस तरह की कॉल आती रहीं। शहर के अलग-अलग हिस्सों में झड़प और बवाल की फर्जी सूचनाएं भी लोगों को मोबाइल के जरिए मिलीं। तस्दीक करने पर पता लगा कि बरेली में सब ठीक-ठाक है।