बरेली। जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से सराय खाम में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन किया गया। इसमें जमाते इस्लामी और अहले हदीस के लोग भी शामिल हुए।
जमीयत के जिला महासचिव मुफ्ती अबू जफर नोमानी अलकासमी ने कयादत करते हुए प्रदर्शन के दौरान कहा कि हम नागरिक संशोधन कानून का विरोध करते हैं। क्योंकि यह कानून भारत के खिलाफ है और सांप्रदायिकता से प्रेरित है। यह कानून देश की नागरिकता को धर्म का आधार बनाता है, जिसकी हम निंदा करते हैं। यह नागरिकता को विभाजित करने की मंशा को जाहिर करते प्रतीत होता है। उन्होंने ऐसे कानून को संविधान के खिलाफ बताते हुए वापस लेने की भी मांग की है। इस दौरान जमीयत उलमा के जिलाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस कासमी, उप जिलाध्यक्ष मोहम्मद इशहाक कासमी, महानगर अध्यक्ष हाफिज मोहम्मद आसिफ, अहले हदीस जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मुस्तकीम अहमद सलफी, इमाम मौलाना शाहिद अली खां आदि ने संबोधित किया। इसमें नफीस आजाद, नदीमुल हसन शमसी आदि का सहयोग रहा। इस दौरान वहां पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ प्रथम को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन दिया गया।
एमआईएम ने किया विरोध प्रदर्शन
राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन, इमाम की रिहाई को लेकर अड़े
बरेली। एमआईएम की ओर से सेठ दामोदर स्वरूप पार्क में नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर प्रदर्शन किया गया। हाथों में तख्तियां लेकर नए कानून को वापस लेने की मांग करते हुए नारेबाजी की और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन प्रेषित किया।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष मोहम्मद असलम ने नागरिकता संशोधन बिल को भारतीय कानून के विरुद्ध बताया। आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा सरकार मुस्लिमों के विरोध में कार्य कर और देश की संस्कृति को नुकसान पहुंचा रही है। यह कानून देश को धार्मिक आधार पर बांटने की साजिश है। भारत में रहने वाले मुस्लिमों को देश की मुख्य धारा से हटाने का प्रयास है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
प्रदर्शन के दौरान इमाम मुफ्ती राहत को रिहा करने की मांग करते हुए कार्यकर्ता रिहाई बाद ही हटने को लेकर अड़ गए। मौके पर पहुंचे अधिकारियों के आश्वासन के बाद वे लोग पार्क से हटे। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट और एसपी सिटी को राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान अन्ने सकलैनी, इमरान मोहम्मद, रिजवान खान, शहजाद खान, मोहम्मद नईम अंसारी, इरशाद अली, नईम अल्वी, मौलाना जाहिद, हाजी मोहम्मद हसन कादरी, इस्लाम, गुल मोहम्मद मदार आदि मौजूद रहे।