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छात्र राजनीति को अपने चंगुल में रखना चाहते हैं राजनीतिक दल

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बरेली। उपन्यासकार नवीन चौधरी का मानना है कि छात्र राजनीति समाज को नई दिशा देने के साथ मुख्य राजनीति के भी मायने बदल सकती है और इसी वजह से राजनीतिक दल कॉलेज कैंपस की राजनीति पर अपनी विचारधारा थोपने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कहीं वे कमजोर न पड़ जाएं। अपने उपन्यास ‘जनता स्टोर’ पर आधारित विमर्श के सिलसिले में विंडरमेयर पहुंचे उपन्यासकार नवीन चौधरी ने छात्र राजनीति के कई पहलुओं पर अमर उजाला से बात की।
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नवीन चौधरी ने बताया कि ‘जनता स्टोर’ दो दशक पुरानी छात्र राजनीति का दर्पण है। आज की राजनीति में सोशल मीडिया का प्रयोग बढ़ गया है। अब जनता सोशल मीडिया पर मुखर है लेकिन बाकी राजनीति के दांव-पेंच पहले जैसे ही हैं और उनमें बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। राजनीतिक दलों के इशारे पर कॉलेज कैंपस में राजनीति के सवाल पर उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति युवा नेतृत्व तैयार करने के लिए शुरू हुई थी। इसने जेपी, तेलगांना, दिल्ली का निर्भया कांड जैसे आंदोलन दिए। राजनीतिक दलों को इससे खतरा महसूस होता है इसलिए उन्होंने ने अपनी विचारधारा को छात्र राजनीति में शामिल कर दिया है। अब यहां भी धनबल और बाहुबल का प्रयोग होने लगा है।
उन्होंने कहा कि इसमें बदलाव होना चाहिए। कैंपस की राजनीति सिर्फ छात्रों के मुद्दों पर हो ताकि गरीब छात्र भी चुनाव लड़कर जीत सकें। कहा, ‘जनता स्टोर’ में लेखकीय सामग्री और कल्पना का 50-50 का अनुपात है लेकिन कल्पना कोरी नहीं है। इसके स्थान और पत्र बदलकर वस्तुस्थिति के मुताबिक कुछ फेरबदल किया गया है। उन्होंने अपने उपन्यास में कैंपस की राजनीति, साजिश, प्रेम और हिंसा को शामिल किया है लेकिन उनका कहना है कि कैंपस में गुरुजन की प्रेरणा भी इसका एक हिस्सा है, जिससे वह काफी प्रभावित रहे। अलग क्षेत्र होने के बावजूद लेखन में कदम रखने को साथियों का प्रोत्साहन बताया। बोले- शुरुआत ब्लॉगर के तौर पर हुई थी और अब उपन्यास लिखते हैं। बताया कि अगले उपन्यास में राज्य की राजनीति उनका विषय होगा लेकिन इसी उपन्यास के किसी पात्र को ही आगे लेकर जाएंगे।
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