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राजनीतिक पार्टियों में बंट गए गांव, कैसे आएगी खुशहाली

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बरेली। भारत गांवों में बसता है, लेकिन आज की सच्चाई यह है कि गांव वोट बैंक की राजनीति में टुकड़ों में बंट गए हैं। आज गांवों में लोग नहीं बल्कि भाजपा, कांग्रेस, सपा, बसपा के लोग बसते हैं। इससे गांवों की एकजुटता तो खत्म हुई ही है साथ खुशहाली भी छिन गई है। अगर देश को समृृद्ध और खुशहाल बनाना है तो पुराने दौर को वापस लाना होगा। यह बात वृंदावन से आए विजय कौशल महाराज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कही। यह दोनों ही एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के स्पोर्ट्स स्टेडियम में खुशहाली फाउंडेशन के पौध वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
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वृक्ष मित्र-ग्राम मित्र अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में गांवों से आए छह हजार से ज्यादा लोगों को 62 हजार फलदार पौधे बांटे गए। फाउंडेशन के अध्यक्ष समीर मोहन ने कहा कि किसानों को खुशहाल बनाना है तो फल सब्जियां उनको खुद उगाना होगा जिसमें फाउंडेशन मदद कर रहा है। डॉ. गोपाल ने कहा कि आज वैज्ञानिक खोज से प्रकृति नष्ट हो रही है। आने वाले सौ साल में धरती रहने लायक नहीं बचेगी। मनुष्य जितना उपभोग कर रहा है उतना वापस भी करना चाहिए।
कौशल महाराज ने कहा कि कीटनाशक लगी दवाइयों से तैयार सब्जी फल खाकर मनुष्य का रक्त मैला होता जा रहा है। जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात कही। मूर्ति पूजा से ज्यादा अच्छा है कि वृक्ष देवता की पूजा करें। भगवान की मूर्ति पर जल चढ़ाने के बजाए पेड़ों पर एक लोटा जल चढ़ाएं। किसानों से कहा कि यह पौधे लगाएं और उनकी हिफाजत करें। कार्यक्रम के दौरान कुलपति प्रोफेसर अनिल शुक्ल, अजय यादव, डॉ. विवेक मिश्रा, डॉ. बृजेश, डॉ. सौरभ मिश्रा, आदित्य प्रकाश आदि मौजूद रहे।
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गांधी जयंती पर गांधी जी को ही याद नहीं किया
पौध वितरण कार्यक्रम गांधी जयंती के मौके पर हुआ था, पर हैरानी की बात रही कि वक्ताओं ने गांधी जी को ही याद नहीं किया। एक दो बार गांधी जी के सिद्धांतों पर बात हुई, लेकिन उसके बाद किसी ने भी अपनी बात में गांधी जी को शामिल करना जरूरी नहीं समझा।

प्लास्टिक उपयोग से दूर रहा कार्यक्रम
पूरे कार्यक्रम में प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया गया। मंच पर बैठे अतिथियों के लिए पीने का पानी मटके में रखा गया। प्लास्टिक के डिस्पोजल का भी उपयोग नहीं किया गया।
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