बरेली। नगर निगम के 14वें वित्त आयोग में गड़बड़ी की शिकायत की जांच एडीएम प्रशासन की अध्यक्षता में बनी टीम कर रही है। जांच टीम नगर निगम से इस प्रकरण से संबंधित रिकॉर्ड मांग चुकी हैं। इधर, मेयर उमेश गौतम ने जांच अधिकारी एडीएम सिटी महेंद्र कुमार को अपना पक्ष भेजते हुए शिकायतों को निराधार बताया है।
एक अधिवक्ता की शिकायत पर एडीएम सिटी महेंद्र कुमार नगर निगम के 14वें वित्त से कराए गए कामों की जांच कर रहे हैं। नगर निगम से रिकॉर्ड भी मांगे जा चुके हैं। इस संबंध में मेयर उमेश गौतम ने एडीएम को स्पष्टीकरण भेजा है। इसमें उन्होंने बताया है कि शिकायत में एक बिंदु कार्यालय के भवन निर्माण को लेकर भी है। इस संबंध में यह अवगत कराना है कि भवन निर्माण के लिए तीन बार ईं-टेंडर की प्रक्रिया हुई थी। पहली और दूसरी बार कोई भी निविदा वैध न मिलने से टेंडर नहीं हो सके थे। तीसरी बार में निविदा सही मिलने पर टेंडर दे दिए गए थे। इसमें पूरी पारदर्शिता बरती गई थी। इसी क्रम में मेयर का कहना है कि शील चौराहे से सलेक्शन प्वाइंट तक सड़क के चौड़ीकरण, सौंदर्यीकरण, जल निकासी और पोल लगाए जाने की भी शिकायत की गई है। जबकि इस काम के लिए भी ई-टेंडर कराए गए थे। इस कार्य के संबंध में डीएम अपनी जांच आख्या मुख्यमंत्री को भेज चुके हैं। प्रकरण की जांच कर रहे एडीएम सिटी का कहना है कि जांच संबंधी रिकॉर्ड नगर निगम से मांगे जा चुके हैं। सभी तथ्योें की सत्यता जांचने के बाद इसकी रिपोर्ट डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह को सौंपी जाएगी।
इस मामले की जांच कराई जा रही है। अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता है। सभी पक्षों की सुनवाई और तथ्यों को एकत्र करने के बाद ही रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। - महेंद्र कुमार सिंह, एडीएम सिटी