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आम आदमी बन कर थाने आया तो पिट गया सिपाही

Sun, 08 Feb 2015 01:13 AM IST
बरेली
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सीओ ने मामले में चुप्पी साधते हुए डीआईजी को रिपोर्ट भेजने की बात कही है। वहीं आईजी विजय सिंह मीना का कहना है कि उन्हें डीआईजी ने सीओ के गनर को मुंशी के थप्पड़ मारने की जानकारी दी है। हालांकि अभी सीओ की रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट के बाद आरोपियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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आईजी के निर्देश पर डीआईजी आरकेएस राठौर ने थानों में आ रही शिकायतों पर पुलिस रिस्पांस की हकीकत जानने के लिए एक जिले के सीओ को दूसरे जिले में भेजकर टेस्ट रिपोर्ट लिखाने के लिए कहा था। शुक्रवार की रात करीब नौ बजे सीओ बिल्सी ने अपने गनर और फालोवर को टेस्ट रिपोर्ट लिखाने के लिए थाना बारादरी भेजा। थाना कार्यालय में मुंशी अरशद हुसैन बैठे थे। हेड मोहर्रिर सतवीर त्यागी अपने कमरे में खाना खा रहे थे। सीओ के गनर और फालोवर ने थाना कार्यालय आकर मुंशी को बताया कि मंडी में उनसे बाइक और नगदी लूट ली गई है। वह शहामतगंज मंडी बताना चाहते थे, लेकिन बता नहीं पा रहे थे। इस पर अरशद ने उन्हें हड़काना शुरू कर दिया। गनर ने रिपोर्ट लिखने की जिद की तो अरशद गुस्सा हो गए और गनर को थप्पड़ मार दिया। गनर और फालोवर ने सीओ के पास जाकर सारी जानकारी दी।
तमतमाए सीओ थाने पहुंचे और अरशद को आड़े हाथों ले लिया। इसी बीच एसएसआई अनिल सिरोही भी थाने पहुंच गए। सीओ ने गनर से कहा कि तुम तहरीर लिखकर दो, मुंशी के खिलाफ मुकदमा मैं लिखाता हूं। गनर ने यह कह कर इंकार कर दिया कि सजा मुंशी के परिवार को भुगतनी पड़ जाएगी। एसएसआई ने किसी तरह सीओ को नार्मल किया। इस पर सीओ थाने से चले आए। उन्होंने अभी तक मामले की रिपोर्ट आला अफसरों को नहीं दी है। सीओ का कहना है कि वह रविवार को मामले की रिपोर्ट डीआईजी को सौंप देंगे। आला अफसर ही मामले में कार्रवाई करेंगे। उधर, थाने में दिन भर घटना की चर्चा होती रही। हेड मोहर्रिर इस बात पर परेशान थे कि मुंशी की कारगुजारी के लपेटे में कहीं वह भी न आ जाए।
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थानों की पोल भी खुल गई
आईजी आम आदमी को पुलिस से जोड़ने की बात कह रहे हैं। डीआईजी ने भी नए साल पर पुलिस और पब्लिक के बीच दूरी कम करने का संकल्प लिया था। लेकिन घटना ने पुलिसिया कार्यशैली की पोल खोल दी। केवल अरशद ही नहीं बल्कि कई थानों में यही हाल है। अगर तहरीर काम की है तो ठीक नहीं तो फरियादियों को थाना स्टाफ का गुस्सा झेलना होता है। मोबाइल खो जाए तो और आफत, पहले तो शपथ पत्र मांगा जाता है और मुट्ठी गरम हो जाए तो बिना शपथ पत्र के ही प्रार्थनापत्र पर ठप्पा लगा दिया जाता है।
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